
पश्चिम बंगाल की भवानीपुर सीट पर वोट पड़ने से पहले ही ज़ोरदार हंगामा शुरू हो गया है। इस बार मुकाबला सिर्फ नेताओं के बीच नहीं, बल्कि चुनाव कराने वाले अफसर पर आकर टिक गया है। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी (TMC) ने चुनाव आयोग से साफ कह दिया है कि भवानीपुर के रिटर्निंग ऑफिसर को तुरंत उनकी कुर्सी से हटाया जाए। टीएमसी का आरोप है कि ये अफसर बीजेपी नेता सुवेन्दु अधिकारी के बहुत करीबी दोस्त हैं। पार्टी को डर है कि अगर ये अफसर अपनी सीट पर बैठा रहा, तो चुनाव में गड़बड़ी हो सकती है और नतीजे भी प्रभावित हो सकते हैं।
नंदीग्राम वाला पुराना 'किस्सा' आया सामने
(TMC) टीएमसी ने अपनी शिकायत में एक पुरानी बात का ज़िक्र किया है। पार्टी का कहना है कि जब ये अफसर नंदीग्राम में तैनात थे, तब उनकी और सुवेन्दु अधिकारी की 'नजदीकियां' सबको पता थीं। टीएमसी (TMC) का सीधा सा सवाल है—जब कोई अफसर किसी बड़े नेता का इतना खास हो, तो वह ईमानदारी से चुनाव कैसे करा पाएगा? पर्चों की जांच से लेकर वोटों की गिनती तक, इस अफसर का रोल बहुत बड़ा होता है, और टीएमसी यहाँ कोई भी चांस नहीं लेना चाहती।
अफसर की कुर्सी और पद पर भी उठे सवाल
सिर्फ दोस्ती ही नहीं, टीएमसी (TMC) ने इस अफसर की मौजूदा नौकरी पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि ये अफसर अभी ज़मीन के कागज़ात वाले विभाग (भूमि अभिलेख) में बहुत बड़े पद पर हैं। ऐसे में उन्हें अचानक चुनाव की ज़िम्मेदारी देना थोड़ा शक पैदा करता है। टीएमसी (TMC) ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर साफ कह दिया है कि ये नियमों के खिलाफ है और इससे चुनाव की साख खराब होती है। उनका मानना है कि इस नियुक्ति के पीछे कोई बड़ी प्लानिंग हो सकती है।
लिस्ट देने के बाद भी आयोग की 'सुस्ती' पर नाराजगी
हैरानी की बात ये है कि इस विवाद को लेकर शिकायत तो 24 मार्च को ही कर दी गई थी। टीएमसी (TMC) का कहना है कि चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से तीन नए अफसरों के नाम भी मांगे थे, और सरकार ने वो नाम भेज भी दिए हैं। लेकिन इतना टाइम बीत जाने के बाद भी पुराने अफसर को हटाया नहीं गया है। टीएमसी (TMC) अब इस देरी से काफी चिढ़ी हुई है और उसका कहना है कि अगर जल्दी एक्शन नहीं लिया गया, तो चुनाव की पूरी प्रक्रिया से लोगों का भरोसा उठ जाएगा।
साख बचाने की बड़ी चुनौती
अब सारी गेंद चुनाव आयोग के पाले में है। भवानीपुर हमेशा से ही बंगाल की सबसे हॉट सीट रही है, और यहाँ छोटी सी बात भी बड़ा बखेड़ा खड़ा कर देती है। टीएमसी (TMC) ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले को छोड़ने वाली नहीं है। अब देखना ये होगा कि आयोग इस अफसर को हटाकर किसी नए चेहरे को लाता है या फिर ये विवाद वोटिंग के दिन तक ऐसे ही चलता रहेगा।
Written by: Anushka sagar






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