
महाराष्ट्र में आज से बजट सत्र की शुरुआत हो रही है, लेकिन इस बार का सत्र शुरुआत से ही विवादों में घिर गया है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि विधानसभा की कार्यवाही नेता प्रतिपक्ष (LoP) के बिना चलेगी। इसी मुद्दे को लेकर सियासी हलकों में हलचल तेज है। विपक्षी दलों का कहना है कि सदन में विपक्ष की आधिकारिक आवाज का न होना लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए ठीक संकेत नहीं है।
एमवीए ने उठाया लोकतंत्र संकट का मुद्दा
महाविकास अघाड़ी (एमवीए) ने इस स्थिति को लोकतांत्रिक मानदंडों के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि जब सरकार के पास पहले से ही मजबूत बहुमत है, ऐसे में नेता प्रतिपक्ष का पद खाली रहना संतुलन की व्यवस्था को कमजोर करता है। एमवीए के नेताओं का मानना है कि विपक्ष की भूमिका केवल विरोध करना नहीं, बल्कि सरकार को जवाबदेह बनाए रखना भी है। अगर उस भूमिका को औपचारिक मान्यता ही न मिले, तो लोकतंत्र की बुनियाद पर असर पड़ता है।
शिवसेना (यूबीटी) का सरकार पर सीधा हमला
शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने इसे लोकतंत्र पर कलंक बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की संवैधानिक भूमिका को कमजोर किया जा रहा है। वहीं पार्टी के विधायक भास्कर जाधव ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसी स्थिति बनाए हुए है जिससे विपक्ष प्रभावी तरीके से अपनी बात न रख सके। उनका कहना है कि यह केवल एक पद का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं का सवाल है।
LoP नहीं, तो जवाबदेही कैसे?
बिना नेता प्रतिपक्ष के यह बजट सत्र कैसे आगे बढ़ता है। सरकार जहां अपने कामकाज और योजनाओं को पेश करने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने के संकेत दे चुका है। आने वाले दिनों में सदन के भीतर बहस कितनी तीखी होती है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल इतना तय है कि इस बार का बजट सत्र केवल आंकड़ों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोकतंत्र और व्यवस्था पर भी चर्चा का केंद्र बनेगा।
Written by : Anushka sagar

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