
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को खत्म करने की कोशिशों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान की ओर से आए शांति प्रस्ताव पर कड़ी नाराजगी जताई। रविवार (10 मई) को ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन द्वारा पेश किए गए युद्धविराम प्रस्ताव पर तेहरान की प्रतिक्रिया अमेरिका के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है।
ट्रंप ने दिखाई सख्ती
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जारी बयान में ट्रंप ने कहा कि ईरान का जवाब उनकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान पिछले कई दशकों से बातचीत को लंबा खींचने और दुनिया को भ्रमित करने की रणनीति अपनाता रहा है। ट्रंप ने लिखा कि अब अमेरिका पहले की तरह तेहरान की चालों को नजरअंदाज नहीं करेगा।
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति की नीतियों की आलोचना की
इस दौरान उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama की नीतियों की भी आलोचना की। ट्रंप का कहना था कि ओबामा प्रशासन की नरम नीति के कारण ही ईरान को फिर से ताकत हासिल करने का अवसर मिला।
ईरान की प्रमुख मांगें
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचे इस प्रस्ताव में ईरान ने कई अहम शर्तें रखीं। ईरान चाहता है कि लेबनान समेत उन सभी क्षेत्रों में संघर्ष समाप्त किया जाए, जहां इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह आमने-सामने हैं। इसके अलावा तेहरान ने आर्थिक प्रतिबंधों में राहत की मांग भी रखी। ईरान चाहता था कि अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) कम से कम 30 दिनों के लिए ईरानी तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील दे।
समुद्री नाकाबंदी और यूरेनियम पर भी बात
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने समुद्री मार्गों पर लागू प्रतिबंध हटाने की मांग की है। वहीं, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की खबर के मुताबिक, तेहरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करने और बची हुई सामग्री किसी तीसरे देश को सौंपने का प्रस्ताव भी रखा है।
Written By Toshi Shah



.jpg)


.jpg)



.jpg)




.jpg)