
Iran Nuclear Program: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच सामने आई नई सैटेलाइट तस्वीरों पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। वहीं यह तस्वीर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अपने कुछ संदिग्ध परमाणु ठिकानों पर दोबारा निर्माण और मरम्मत का काम कर रहा है। यह गतिविधियां ऐसे समय सामने आई हैं, जब पिछले महीने दोनों देशों के बीच हुए 14 सूत्रीय मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के तहत ईरान ने परमाणु हथियार विकसित नहीं करने का वादा किया था। ऐसे में इन नई तस्वीरों ने समझौते के पालन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पारचिन परमाणु परिसर में निर्माण गतिविधियां तेज
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक गतिविधियां पारचिन परमाणु परिसर में देखी गई हैं। यह वही परिसर है, जहां अतीत में परमाणु हथियारों से जुड़े विस्फोटक परीक्षण किए जाने की आशंका कई बार जताई जाती रही है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले से पहले ईरान ने इस परिसर के आसपास कंक्रीट की मजबूत सुरक्षा परत तैयार की थी। हमले के दौरान इस इलाके को नुकसान पहुंचा था, लेकिन जून और जुलाई में ली गई ताजा सैटेलाइट तस्वीरों में वहां मरम्मत और नए निर्माण कार्य के स्पष्ट संकेत दिखाई दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेजी से दोबारा निर्माण शुरू होना अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
पिकऐक्स माउंटेन में सुरंगों के भीतर हलचल
रिपोर्ट में पिकऐक्स माउंटेन का भी उल्लेख किया गया है, जिसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संवेदनशील और रणनीतिक ठिकाना माना जाता है। सैटेलाइट तस्वीरों में सुरंगों के भीतर वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह गतिविधियां परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी हैं, तो यह अमेरिका के साथ हुए समझौते की भावना के अनुरूप नहीं मानी जाएंगी। हालांकि, फिलहाल इन गतिविधियों का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।
अन्य परमाणु केंद्रों पर फिलहाल शांति
रिपोर्ट के अनुसार, इस्फहान, फोरडो और नतांज जैसे ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्रों पर फिलहाल किसी बड़े नए निर्माण या गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि, कुछ मिसाइल भंडारण केंद्रों पर मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य शुरू होने के प्रमाण जरूर सामने आए हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी देश लंबे समय से ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती मानते रहे हैं। ऐसे में इन ठिकानों पर बढ़ती गतिविधियां भी पश्चिमी देशों की चिंता का कारण बन सकती हैं।
क्या था 14 सूत्रीय समझौता?
पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय MoU का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करना और परमाणु कार्यक्रम को लेकर विश्वास बहाल करना था। इस समझौते में ईरान ने दोहराया था कि वह न तो परमाणु हथियार विकसित करेगा और न ही उन्हें हासिल करने की दिशा में कोई कदम उठाएगा। इसके अलावा, संवर्धित यूरेनियम के भंडार से जुड़े मुद्दों का समाधान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में करने पर भी सहमति बनी थी। इस समझौते को दोनों देशों के रिश्तों में संभावित सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था।
बढ़ सकता है कूटनीतिक तनाव
नई सैटेलाइट तस्वीरों के सामने आने के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या ईरान समझौते की शर्तों का पूरी तरह पालन कर रहा है। हालांकि, अभी तक ईरान की ओर से इन निर्माण गतिविधियों को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और न ही यह पुष्टि हुई है कि इनका संबंध परमाणु हथियार कार्यक्रम से है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही सीजफायर समाप्त होने का ऐलान कर चुके हैं। ऐसे में यदि इन गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेह और गहराता है, तो अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में IAEA की निगरानी रिपोर्ट और दोनों देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
Written By: Geeta Sharma















