
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक तस्वीर और वीडियो ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं। इस वीडियो में एक लड़की ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के जलते हुए पोस्टर से सिगरेट जलाती हुई नजर आ रही है। यह तस्वीर सामने आते ही इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गई और लोग जानने लगे कि आखिर यह लड़की कौन है और उसने ऐसा क्यों किया।
कौन हैं खामेनेई के पोस्टर से सिगरेट जलाने वाली मोहतरमा?
इस वायरल वीडियो में दिखने वाली लड़की की पहचान मोर्टेशिया एडम्स के रूप में हुई है। वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर इसी नाम से सक्रिय हैं। एक इंटरव्यू में मोर्टेशिया ने साफ तौर पर कहा कि वह अली खामेनेई को सुप्रीम लीडर नहीं मानतीं। उनके मुताबिक, खामेनेई ईरान के नेता नहीं बल्कि एक तानाशाह हैं।
कहां रहती हैं मोर्टेशिया एडम्स?
मोर्टेशिया फिलहाल कनाडा में रह रही हैं। उन्होंने बताया कि यह कदम उन्होंने ईरान में रहने वाले अपने दोस्तों और देशवासियों के समर्थन में उठाया। उनका कहना है कि भले ही वह शारीरिक रूप से अपने देश से दूर हैं, लेकिन उनका दिल और आत्मा आज भी ईरान के लोगों के साथ है।
पोस्टर से सिगरेट क्यों जलाई?
मोर्टेशिया ने इंटरव्यू में बताया कि ईरान में खामेनेई की तस्वीर जलाना एक गंभीर अपराध माना जाता है और इसके लिए कड़ी सजा, यहां तक कि मौत की सजा भी हो सकती है। इसके बावजूद उन्होंने यह कदम उठाया ताकि दुनिया का ध्यान ईरान में महिलाओं और आम नागरिकों पर हो रहे अत्याचारों की ओर जा सके।
हिजाब को लेकर विरोध
मोर्टेशिया ने कहा कि उन्हें हिजाब से सख्त नफरत है और इसी वजह से उन्हें ईरान में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि एक दिन ईरानी पुलिस उनके घर आई, उनके पिता को धक्का देकर गिरा दिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ समय बाद रिहा होने पर उन्होंने देश छोड़ने का फैसला कर लिया।
ईरान छोड़कर कैसे पहुंचीं कनाडा?
गिरफ्तारी और उत्पीड़न के बाद मोर्टेशिया पहले तुर्की गईं और वहां से उन्हें कनाडा का वीज़ा मिला। इसके बाद वह कनाडा में बस गईं।
डिजिटल ब्लैकआउट में भी उठा रहीं आवाज
मोर्टेशिया का कहना है कि ईरान में अक्सर डिजिटल ब्लैकआउट कर दिया जाता है, जिससे वहां की सच्चाई दुनिया तक नहीं पहुंच पाती। इसी वजह से विदेश में रह रहे ईरानी नागरिक सोशल मीडिया के जरिए अपने देश की हालत दुनिया को बता रहे हैं। मोर्टेशिया का यह विरोध अब ईरान में चल रहे आंदोलनों और महिलाओं की आज़ादी की लड़ाई का एक मजबूत प्रतीक बनता जा रहा है।


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