खरगे विवाद पर CPI का साथ, डॉ. राजा ने BJP-RSS को घेरा

कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, वित्तीय स्रोतों, आय-व्यय और संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी। उनका कहना था कि आरएसएस को भी पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही के मानकों का पालन करना चाहिए। खरगे के इस पत्र के बाद बीजेपी सांसद रमेश जिगाजिनगी ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

2 घंटे पहले

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INDIA गठबंधन के भीतर हाल के दिनों में कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच बढ़ते मतभेदों की चर्चा तेज रही है। राहुल गांधी और सीपीएम नेता पिनराई विजयन को लेकर हुए विवाद ने गठबंधन के अंदर मौजूद असहजता को सामने ला दिया था। हालांकि अब कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे से जुड़े विवाद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के कांग्रेस के पक्ष में खुलकर उतरने से राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। सीपीआई महासचिव डॉ. राजा ने बीजेपी सांसद रमेश जिगाजिनगी की टिप्पणी की कड़ी आलोचना करते हुए इसे दलित विरोधी और जातिवादी मानसिकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि संविधान की ताकत के साथ उनकी पार्टी आरएसएस और बीजेपी से सवाल पूछती रहेगी और जाति व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी।

प्रियांक खरगे के समर्थन में आए डॉ. राजा

डॉ. राजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि रमेश जिगाजिनगी का बयान यह दर्शाता है कि आरएसएस-बीजेपी के भीतर दलित समुदायों के प्रति गहरे पूर्वाग्रह मौजूद हैं। उनके मुताबिक ऐसी टिप्पणियां समानता और सामाजिक न्याय की भावना को कमजोर करती हैं तथा जातिगत ऊंच-नीच को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर आरएसएस-बीजेपी को दलितों द्वारा अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करने और सवाल पूछने से परेशानी क्यों होती है। डॉ. राजा ने कहा, "डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान की ताकत के साथ हम सवाल पूछते रहेंगे और जाति व्यवस्था के खात्मे के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।"

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, वित्तीय स्रोतों, आय-व्यय और संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी। उनका कहना था कि आरएसएस को भी पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही के मानकों का पालन करना चाहिए। खरगे के इस पत्र के बाद बीजेपी सांसद रमेश जिगाजिनगी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। विजयपुरा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि आरएसएस के बारे में सवाल उठाना प्रियांक खरगे का काम नहीं है और "जो भी आरएसएस के रास्ते में आया, वह नहीं बचा।" विवाद तब और बढ़ गया जब उन्होंने कहा, "इस दलित व्यक्ति को आरएसएस की चिंता करने की जरूरत ही क्या है?" विपक्षी दलों ने इस टिप्पणी को दलित विरोधी बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई।

राहुल गांधी और पिनराई विजयन विवाद से बढ़ी थी दूरी

इसी बीच INDIA गठबंधन के भीतर कांग्रेस और वामपंथी दलों के रिश्तों में भी तनाव देखने को मिला था। जून में हुई गठबंधन की एक बैठक के दौरान राहुल गांधी का एक ऑडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह केरल के वरिष्ठ वामपंथी नेता पिनराई विजयन को गले नहीं लगाएंगे क्योंकि उनके बीच राजनीतिक लड़ाई जारी है।
राहुल गांधी ने कहा था, "हमारे बीच राजनीतिक मतभेद हैं। अगर कोई मुझसे कहे कि मैं जाकर उन्हें गले लगाऊं, तो मैं ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि हमारी राजनीतिक लड़ाई अभी भी जारी है।" राहुल गांधी की इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस और वाम दलों के संबंधों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं।

पिनराई विजयन ने भी दिया जवाब

राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पिनराई विजयन ने कहा कि उनके और राहुल गांधी के बीच कभी गले मिलने की कोई परंपरा नहीं रही है। उन्होंने कहा कि दोनों नेता आमतौर पर औपचारिक अभिवादन या हाथ मिलाने तक ही सीमित रहते हैं। हालांकि विजयन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी चिंता व्यक्तिगत व्यवहार को लेकर नहीं, बल्कि उस राजनीतिक संदेश को लेकर है जो राहुल गांधी के बयान से जनता के बीच जाता है। अब प्रियांक खरगे विवाद में सीपीआई के कांग्रेस समर्थक रुख ने यह संकेत दिया है कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की राजनीति अभी भी INDIA गठबंधन की प्राथमिकता बनी हुई है।

 

 Written By: Archana Gputa

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