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Noida: नोएडा का उत्तराखंड पब्लिक स्कूल एक बार फिर विवादों में घिरा हुआ है। ऐसी खबर है कि स्कूल की मान्यता रद्द होने के बाद अब नोएडा प्राधिकरण ने उसे आवंटित की गई जमीन को वापस लेने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके बाद स्कूल में पढ़ रहे छात्रों के अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। बता दें, उत्तराखंड पब्लिक स्कूल नोएडा के सेक्टर 56 में स्थित है। जिसमें 9वीं से 12वीं तक प्रत्येक कक्षा में तीन-तीन सेक्शन संचालित हो रहे हैं। प्रत्येक सेक्शन में 35 से 40 छात्र हैं। साथ ही 10वीं और 12वीं के छात्र बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं।
पूरा मामला क्या है?
सूत्रों की माने तो उत्तराखंड पब्लिक स्कूल का विवाद नया नहीं है। इससे पहले भी नोएडा का यह स्कूल विवादों में आ चुका है। बताया जा रहा है कि स्कूल की मान्यता रद्द होने के बाद अब नोएडा प्राधिकरण ने उसे आवंटित की गई जमीन वापस लेने की तैयारी शुरू कर दी है। स्कूल की मान्यता रद्द करने का फैसला CBSEबोर्ड द्वारा लिया गया। जिसके बाद से प्राधिकरण ने भी सक्रियता दिखाते हुए पूरे मामले की फाइल खंगालनी शुरू कर दी है।
स्कूल ट्रस्ट ने नहीं मानी आवंटन शर्तों का पालन
कहा जा रहा है कि वर्ष 1991 में उत्तराखंड पब्लिक स्कूल ट्रस्ट को करीब 3549 वर्ग मीटर जमीन शैक्षणिक उद्देश्य से आवंटित की गई थी। नियम के अनुसार जमीन का उपयोग केवल शिक्षा संबंधी गतिविधियों के लिए किया जाना था और शर्तों का पालन अनिवार्य था, लेकिन आवंटन के समय तय की गई शर्तों के पालन को लेकर समय-समय पर सवाल उठाते रहे हैं। अब जब स्कूल की मान्यता रद्द कर दी गई है तो जमीन के उपयोग को लेकर भी पुनर्विचार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
स्कूल में शर्तों का पालन 1100 छात्र
बता दें, स्कूल में 9वीं से 12वीं तक प्रत्येक कक्षा में तीन-तीन सेक्शन संचालित हैं। हर सेक्शन में 35 से 40 छात्र हैं। 10वीं और 12वीं के छात्र बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं। जबकि 9वीं और 11वीं के छात्रों को लेकर सबसे अधिक चिंता बनी हुई है। हालांकि स्कूल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि होली के बाद से सभी बच्चों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट करा दिया जाएगा।
अभिभावकों ने जताई चिंता
वहीं हाल ही में हुई बैठक में स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को से 1 सप्ताह का समय मांगा है और आश्वासन दिया है कि CBI अधिकारियों से संपर्क कर समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। अभिभावक इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। अभिभावकों का कहना है कि अगर जमीन वापस ली जाती है तो स्कूल पूरी तरह बंद होने की स्थिति में आ सकता है, जिस वजह से बच्चों को अन्य स्कूलों में शिफ्ट करना पड़ेगा। इस पूरी प्रक्रिया में बच्चों की पढ़ाई बाधित हो सकती है।
प्राधिकरण की अगली कार्रवाई पर निगाहें
अब स्कूल के मान्यता रद्द होने और प्राधिकरण की तरफ से जमीन वापसी को लेकर सभी की निगाहें प्राधिकरण के फैसले पर टिकी हुई हैं। अगर जमीन वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो यह स्कूल प्रशासन के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। क्योंकि 1100 छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ सवाल है। फिलहाल, प्राधिकरण दस्तावेजों की जांच कर रहा है और अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
शिक्षकों ने स्कूल प्रबंधन पर लगाए प्रताड़ित करने के आरोप
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर 35 साल बाद प्राधिकरण नींद से अब क्यों जागा है। पहले से कार्रवाई क्यों नहीं की गई? वहीं प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना था कि उन्हें सिर्फ इतनी जानकारी थी कि स्कूल संचालित है, लेकिन पिछले साल जब कई शिक्षकों ने स्कूल प्रबंधन पर आरोप लगाए कि उनको प्रताड़ित किया जा रहा है। इतना ही नहीं उनकी सैलरी भी टाइम पर नहीं दी जा रही है, जिसको लेकर उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा और एक पत्र सीबीएसई बोर्ड प्रबंधन को भी लिखा है। इस मामले में जांच के बाद स्कूल प्रबंधन दोषी पाया गया जिसके चलते स्कूल की मान्यता रद्द करने का फैसला सीबीएसई बोर्ड द्वारा लिया गया। पूरे मामले में प्रशासन की ओर से जांच कर रहा है कि आखिर बच्चों से ली गई फीस का पैसा कहां गया?
Writen By: Geeta Sharma

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