
बजट में आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालने वाले कई फैसले सामने आए हैं। पेट्रोल-डीजल पर टैक्स ढांचे में बदलाव और कुछ राज्यों में कर बढ़ने से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने का असर सब्जियों, फल और रोजमर्रा के सामान पर भी पड़ेगा। इसके अलावा मोबाइल रिचार्ज, प्राइवेट हेल्थ सर्विस और स्कूल-कॉलेज की फीस पर खर्च बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
कौन-सी चीजें हुईं सस्ती?
बजट में राहत की खबर भी है। सरकार ने कैंसर और गंभीर बीमारियों से जुड़ी कई जरूरी दवाइयों को सस्ता करने का ऐलान किया है, जिससे मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान और सोलर उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई है, जिससे आने वाले समय में ये चीजें सस्ती हो सकती हैं। इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों के लिए खाद और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी बढ़ाई गई है।
आम आदमी के लिए क्यों खास है ये बजट?
बजट 2026-27 का फोकस रोजगार, मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू मांग बढ़ाने पर रहा है। सरकार का मानना है कि अगर नौकरियां बढ़ेंगी तो महंगाई का दबाव अपने आप कम होगा। हालांकि इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव न होने से मिडिल क्लास को थोड़ी निराशा जरूर हुई है। इसके बावजूद स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा और ग्रामीण विकास में बढ़ा खर्च लंबे समय में आम आदमी की जिंदगी आसान और बेहतर बनाएगा।
राहत और महंगाई का मिला-जुला असर
कुल मिलाकर बजट 2026-27 आम आदमी के लिए राहत और चिंता दोनों लेकर आया है। एक तरफ ईंधन, ट्रांसपोर्ट और जरूरी सेवाओं के महंगे होने से घर का बजट बिगड़ सकता है, तो दूसरी तरफ जरूरी दवाइयों के सस्ता होने और ग्रामीण व मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिली मदद से कुछ उम्मीद जरूर बनी है। सरकार रोजगार बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बात कर रही है, लेकिन आम आदमी को इस बजट का असली असर तब ही महसूस होगा, जब महंगाई काबू में आए और घोषणाएं कागज से निकलकर जमीन पर दिखें।
Written by: Anushka sagar















