
पेरिस में आयोजित AI Impact Summit में 70 से ज्यादा देशों ने मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जिम्मेदार उपयोग को लेकर एक साझा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। सम्मेलन के औपचारिक समापन के साथ यह दस्तावेज़ आधिकारिक रूप से जारी किया जाएगा। इस पहल को एआई के सुरक्षित और संतुलित विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
किन मुद्दों पर हुई चर्चा
दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में कई देशों के नेता, टेक विशेषज्ञ और नीति-निर्माता शामिल हुए। बातचीत का मुख्य फोकस रहा—डेटा सुरक्षा, प्राइवेसी, फेक न्यूज, डीपफेक, साइबर खतरों और रोजगार पर एआई के असर जैसे मुद्दे। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक का विकास जरूरी है, लेकिन यह इंसानी अधिकारों और कानूनों के दायरे में होना चाहिए।
घोषणापत्र में क्या खास
साझा घोषणापत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि एआई का इस्तेमाल मानव हित और समाज की भलाई के लिए होना चाहिए। देशों ने वादा किया है कि वे मिलकर ऐसे नियम बनाएंगे जो तकनीक के दुरुपयोग को रोकें। साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में एआई के सकारात्मक उपयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को इस दिशा में सबसे अहम माना गया है।
अब दुनिया की नजर अमल पर
सम्मेलन के समापन के साथ अब सबकी नजर इस बात पर है कि ये वादे जमीन पर कैसे उतरेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर देश मिलकर तय किए गए नियमों को ईमानदारी से लागू करें, तो एआई आने वाले समय में विकास की नई राह खोल सकता है। आज जारी होने वाला यह घोषणापत्र सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि जिम्मेदार तकनीकी भविष्य की ओर बढ़ाया गया ठोस कदम माना जा रहा है।
Written by : Anushka sagar

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