
विक्रांत मैसी की नई वेब सीरीज Musafir Cafe अपने नाम और ट्रेलर की वजह से काफी उम्मीदें जगाती है। लगा था कि यह प्यार, रिश्तों और जिंदगी के सफर पर आधारित एक दिल छू लेने वाली रोमांटिक कहानी होगी। लेकिन रिलीज के बाद सीरीज उम्मीदों पर खरी उतरती नजर नहीं आती। आठ एपिसोड की यह सीरीज इतनी धीमी रफ्तार से आगे बढ़ती है कि कई जगह दर्शक का धैर्य जवाब देने लगता है।
कहानी में उलझे तीन किरदार
सीरीज की कहानी चंदर (विक्रांत मैसी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पहाड़ों में जाकर अपना कैफे खोलने का सपना देखता है। उसकी मुलाकात भोपाल में तलाक की वकील सुधा (वेदिका पिंटो) से होती है और दोनों के बीच रिश्ता आगे बढ़ता है। वहीं दूसरी तरफ कहानी चंदर की जिंदगी में प्रीति (महिमा मकवाना) की मौजूदगी भी दिखाती है, जो उसके कैफे की पार्टनर है। सीरीज इन तीनों किरदारों की जिंदगी और रिश्तों को जोड़ने की कोशिश करती है, लेकिन कहानी का यह पैरेलल ट्रैक दर्शकों को बांध नहीं पाता।
धीमी रफ्तार सबसे बड़ी समस्या
Musafir Cafe की सबसे बड़ी कमी इसकी कमजोर गति है। शुरुआती कई एपिसोड में ऐसा महसूस होता है कि कहानी आगे बढ़ ही नहीं रही। किरदारों के बीच भावनाओं को दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन स्क्रीन पर वह असर पैदा नहीं हो पाता।
कुछ दृश्य खूबसूरत जरूर लगते हैं, जिन्हें सोशल मीडिया क्लिप्स के लिए पसंद किया जा सकता है, लेकिन एक पूरी सीरीज के तौर पर यह प्रभाव छोड़ने में असफल रहती है। जब कहानी आखिर में आगे बढ़ती है, तब भी ऐसा कुछ नया देखने को नहीं मिलता जो दर्शकों को चौंका सके।
विक्रांत मैसी ने संभाली एक्टिंग की जिम्मेदारी
विक्रांत मैसी इस सीरीज की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उन्होंने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है। उनकी मासूमियत और भावनात्मक अभिनय कई दृश्यों में प्रभावित करता है। हालांकि कमजोर लेखन के कारण उनकी प्रतिभा का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया।
वेदिका पिंटो का अभिनय अच्छा है और वह अपने किरदार में सहज नजर आती हैं। महिमा मकवाना का काम ठीक-ठाक है, लेकिन उनके किरदार को ज्यादा गहराई नहीं दी गई। आदिल हुसैन जैसे अनुभवी कलाकार का भी प्रभावी उपयोग नहीं हो पाया।
कमजोर राइटिंग और औसत निर्देशन
सीरीज की कहानी दिव्य प्रकाश दुबे और शरन्या राजगोपाल ने लिखी है, जबकि निर्देशन रुचिर अरुण ने किया है। राइटिंग इसकी सबसे कमजोर कड़ी साबित होती है। कहानी दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाने में असफल रहती है और कोई ऐसा संवाद या दृश्य नहीं बन पाता जो लंबे समय तक याद रहे।
फैसला: समय देने से पहले सोचें
कुल मिलाकर Musafir Cafe एक ऐसी सीरीज है जिसमें अच्छे कलाकार होने के बावजूद कमजोर कहानी और धीमी रफ्तार इसकी सबसे बड़ी समस्या बन जाती है। खूबसूरत लोकेशन और कुछ अच्छे अभिनय के अलावा इसमें ऐसा बहुत कम है जो दर्शकों को बांध सके।
रेटिंग: ⭐ 1.5/5
Written By: Archana Gupta



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