
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के मद्देनज़र रखते हुए कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के फैसले पर अब सुप्रीम कोर्ट ने भी गंभीर रुख अपनाया है। इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि यदि दोपहर तक स्थिति का समाधान नहीं निकला, तो सर्वोच्च न्यायालय स्वयं हस्तक्षेप करने पर विचार करेगा, उन्होंने यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान की, जिसमें अदालत आने-जाने वाले वकीलों, वादियों और न्यायिक कर्मचारियों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया गया था।
मेट्रो बंदी के खिलाफ SCBA पहुंची सुप्रीम कोर्ट
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की ओर से दायर की गई थी। एसोसिएशन ने अदालत से अनुरोध किया कि सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखते हुए कम से कम वकीलों, मुकदमे से जुड़े पक्षकारों और न्यायालय के कर्मचारियों को मेट्रो स्टेशनों के माध्यम से सीमित प्रवेश की अनुमति दी जाए, ताकि न्यायिक कार्य प्रभावित न हो। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वकीलों की अनुपस्थिति के कारण किसी भी मामले में ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया जाएगा जिससे किसी पक्ष को नुकसान पहुंचे। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि यदि प्रशासन समय रहते उचित व्यवस्था नहीं करता है, तो अदालत इस विषय पर आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है।
सुरक्षा कारणों से बंद किए 16 मेट्रो स्टेशन- DMRC
इस बीच, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राजधानी के 16 मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया। इन स्टेशनों में राजीव चौक, सुप्रीम कोर्ट, मंडी हाउस, आईटीओ, लोक कल्याण मार्ग, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंबा रोड, सेवा तीर्थ, जनपथ, केंद्रीय सचिवालय, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम शामिल हैं। डीएमआरसी ने बताया कि यह व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी।
इंटरचेंज स्टेशनों पर आवाजाही की सुविधा जारी
हालांकि, यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुछ प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर लाइन बदलने की सुविधा जारी रखी गई है। राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय जैसे स्टेशनों पर यात्री बिना स्टेशन से बाहर निकले एक लाइन से दूसरी लाइन में जा सकते हैं। इससे रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
भीड़ नियंत्रण को लेकर उठाए गए कदम पर सुप्रीम कोर्ट की नजर
बताया जा रहा है कि जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में लगातार बढ़ रही भीड़ और सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के बाद यह कदम उठाया गया। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है, जबकि दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ न्यायिक कार्यों और आम नागरिकों की आवाजाही पर भी बराबर ध्यान दिया जाना चाहिए। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन अदालत की चिंता को किस तरह संबोधित करता है और आगे क्या निर्णय लिया जाता है।
Written By Toshi Shah





.jpg)




.jpg)
.jpg)



