'भ्रष्टाचार रोकना है तो मृत्युदंड पर सोचें', इलाहाबाद हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान देश में बढ़ते भ्रष्टाचार पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कड़ी टिप्पणियां की हैं।

3 घंटे पहले

और पढ़े

  1. पटना में छात्रों का बड़ा प्रदर्शन! पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस, वॉटर कैनन से रोका मार्च
  2. दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशन हुए बंद! यात्रा से पहले देखें पूरी लिस्ट
  3. CJP के प्रदर्शन पर अरविंद केजरीवाल का बड़ा खुलासा! 'आंसू गैस के बीच मौजूद थे मेरे दोनों बच्चे'
  4. यूपी टी-20 लीग सीजन-4 की धमाकेदार शुरुआत! इकाना स्टेडियम में लॉन्च हुआ उद्घाटन समारोह का टिकट
  5. Sonam Wangchuk की तबीयत पर हाईकोर्ट सख्त, मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने का दिया आदेश
  6. हिंसक प्रदर्शन मामले में दिल्ली पुलिस किस एंगल पर कर रही जांच? पूरी लिस्ट आई सामने
  7. मोल्दोवा की कंपनियों को भारत में व्यापार और निवेश के अच्छे अवसर मिलेंगे: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
  8. लोकतांत्रिक रूप से प्रदर्शन करने युवाओं पर लाठीचार्ज करने की घटना निंदनीय हनुमान बेनीवाल
  9. जौहर यूनिवर्सिटी पर ध्वस्तीकरण का आदेश! मौलाना महमूद मदनी ने की सरकार से बड़ी अपील
  10. संसद मार्च को लेकर दिल्ली में हंगामा: जंतर-मंतर खाली कराया गया, जानें CJP प्रदर्शन की बड़ी बातें
  11. PM मोदी का राहुल गांधी पर तंज! बोले- 'मैं 56 साल के युवा की बात नहीं...'
  12. जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की मुहिम में युवाओं और अभिभावकों के हम पूरी तरह साथ-अखिलेश
  13. वैश्विक शैक्षिक नेतृत्व का साक्षी बना पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय एंड्रयूज़ गंज
  14. नगालैंड में भीषण लैंडस्लाइड: 4 लोगों की मौत, कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका
  15. टीएमसी का मर्जर अटका, शिवसेना को मंजूरी: क्या पार्टी लाइन से अलग वोट दे सकते हैं सांसद?

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान देश में बढ़ते भ्रष्टाचार पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कड़ी टिप्पणियां की हैं। अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार अब समाज में सामान्य बात बनता जा रहा है, जो लोकतंत्र और कानून के शासन के लिए बेहद चिंताजनक है। कोर्ट ने यहां तक कहा कि यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाना चाहती है, तो भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन कर गंभीर मामलों में मृत्युदंड जैसे कठोर दंड के प्रावधान पर भी विचार किया जाना चाहिए।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का किया उल्लेख

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने अपने फैसले में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना समाज में ईमानदारी के गिरते स्तर का गंभीर संकेत है। अदालत के अनुसार, धार्मिक आस्था के सबसे संवेदनशील केंद्रों में से एक माने जाने वाले राम मंदिर के दान में कथित गड़बड़ी का मामला भी लोगों को अपेक्षित रूप से शर्मिंदा नहीं कर सका। कोर्ट ने इसे "ऊंट की पीठ पर आखिरी तिनका" बताते हुए कहा कि यदि ऐसी घटनाएं भी समाज को झकझोर नहीं पा रहीं, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।

बुलडोजर कार्रवाई मामले की सुनवाई के दौरान आई टिप्पणी

यह टिप्पणी हमीरपुर निवासी कैफुद्दीन समेत अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की गई। याचिकाकर्ताओं ने बुलडोजर कार्रवाई पर रोक और संरक्षण की मांग की थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थनंद की खंडपीठ ने की। हालांकि, फैसले के कुछ बिंदुओं पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थनंद ने अलग राय भी व्यक्त की।

भ्रष्ट अधिकारियों और अवैध निर्माण पर अदालत की नाराजगी

हाई कोर्ट ने कहा कि नगर निगम और अन्य विकास प्राधिकरणों के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण खड़े हो जाते हैं। अधिकारी रिश्वत लेकर आंखें मूंद लेते हैं और बाद में जब कार्रवाई होती है, तो उसका सबसे बड़ा नुकसान उन लोगों को उठाना पड़ता है जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से मकान खरीदे होते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण कराने वाले बिल्डरों के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

बढ़ती आर्थिक असमानता पर भी जताई चिंता

कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार केवल प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक असमानता को भी बढ़ा रहा है। भ्रष्टाचार के कारण कुछ लोगों के पास अवैध रूप से अपार संपत्ति इकट्ठी हो रही है, जबकि आम नागरिक संसाधनों और अवसरों से वंचित रह जाते हैं। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक नहीं लगी तो भविष्य में सामाजिक असंतोष और गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल रिपोर्ट का हवाला

अपने 51 पृष्ठों के फैसले में न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2025 की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि 182 देशों की सूची में भारत का 91वां स्थान यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके बावजूद समाज में भ्रष्टाचार के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता और जवाबदेही दिखाई नहीं देती, जो चिंता का विषय है।

बुलडोजर कार्रवाई पर महत्वपूर्ण सुझाव

फैसले में अदालत ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भी कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की राय थी कि किसी आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद दो वर्ष तक उसका मकान ध्वस्त नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही यदि कोई व्यक्ति किसी मकान में तीन वर्ष या उससे अधिक समय से रह रहा है, तो ध्वस्तीकरण से कम से कम एक वर्ष पहले नोटिस देकर उसे वैकल्पिक व्यवस्था का अवसर मिलना चाहिए।

हालांकि, न्यायमूर्ति सिद्धार्थनंद ने इस सुझाव से असहमति जताई। उनका कहना था कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट इस प्रकार की निश्चित समय-सीमा तय नहीं कर सकता। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसा प्रावधान भविष्य में आरोपियों द्वारा केवल एफआईआर दर्ज कराकर कार्रवाई टालने के लिए दुरुपयोग का माध्यम बन सकता है।

अदालत की टिप्पणी, अंतिम फैसला नहीं

गौरतलब है कि भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में मृत्युदंड का सुझाव अदालत की टिप्पणी (ऑब्जर्वेशन) के रूप में सामने आया है, न कि किसी बाध्यकारी कानूनी निर्देश के रूप में। ऐसे किसी प्रावधान को लागू करने के लिए संसद द्वारा कानून में संशोधन आवश्यक होगा। फिलहाल अदालत की इन टिप्पणियों ने भ्रष्टाचार, प्रशासनिक जवाबदेही और अवैध निर्माण जैसे मुद्दों पर एक व्यापक बहस को जन्म दिया है।

 

Written By: Geeta Sharma 

TNP News,

115 B Hind Saurashtra Indl Estate, Marol Metro Station Andheri East, Mumbai - 400059
Call: +91 9818841730, +91 9818821470
Email: info@tnpnews.in