
यूपी में अबकी बार किसकी सरकार..जी हां,देश में ये चर्चा अब धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी है। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर गली,नुक्कड़ और चाय-पान की दुकानों पर महफिलें सजनी लगी हैं। सब इसी बात की चर्चा करते दिख रहे हैं कि, योगी हैट्रिक लगाएंगे या फिर साइकिल मैदान साफ करेगी? लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि, इस बार यूपी में चुनावी मुद्दे क्या होंगे,जिसके जरिये चुनावी किला फतह किया जा सकेगा? विपक्ष सरकार को घेरने के लिए कौन-कौन से मुद्दे उठा सकता है? और सत्ता पक्ष विपक्ष की हवा निकालने के लिए किन-किन मुद्दों को हवा दे सकता है? आइए आपको विस्तार से बताते हैं।
यूपी चुनाव में कौन-कौन से मुद्दे रहेंगे हावी?
यूपी चुनाव इस बार किन-किन मुद्दों पर लड़ा जाएगा। इसकी तस्वीर फिलहाल अभी साफ नहीं है।लेकिन ऐसे कई मुद्दे हैं,जिसे विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ योगी सरकार भी विपक्ष को जवाब देने की तगड़ी रणनीति तैयार कर रही है। चलिए जानते हैं कि,यूपी की जनता आखिर किन-किन मुद्दों को ध्यान में रखकर वोट कर सकती है।
मुद्दा नंबर-1
रोजगार होगा बड़ा चुनावी मुद्दा!
यूपी चुनाव में इस बार सबसे बड़ा जो मुद्दा हावी होने जा रहा है,वो बेरोजगारी का है। इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि, विपक्ष अभी से बेरोजगारी को लेकर हवा बना रहा है। विपक्ष का ऐसा करना लाजमी भी है। क्योंकि यूपी में एक बड़ी आबादी युवाओं की है,जो नौकरी के लिए भटक रही है।सरकार के लाख दावों के बाद भी बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है। एक तरफ सरकारी पद न के बराबर निकल रहे हैं,तो दूसरी तरफ प्राइवेट नौकरियों का भी वो अनुपात नहीं है,जिस हिसाब से युवा बेरोजगार हैं। इधर पेपर लीक,भर्ती परीक्षाओं में देरी भी युवाओं का मनोबल तोड़ रही है। लिहाजा यदि युवाओं को लगने लगा कि,योगी सरकार उनके भविष्य को लेकर संजीदा नहीं है,तो ये बीजेपी के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।
मुद्दा नंबर-2
यूपी से माफिया राज का खात्मा!
उत्तर प्रदेश में जब से योगी राज कायम हुआ है,तब से कानून-व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। ये बात यूपी के साथ-साथ दूसरे राज्यों की जनता महसूस भी कर रही है। योगी सरकार भी इसका दावा करने से पीछे नहीं हटती है। सीएम योगी अक्सर अपनी सभाओं में समाजवादी शासनकाल के कानून-व्यवस्था की याद दिलाते रहते हैं। लोगों को ये बताते रहते हैं कि,कैसे अखिलेश यादव के शासन में माफियाओं और गुंडों से व्यापारी और माता-बहनें परेशान थी। लेकिन जब से यूपी में बीजेपी की सरकार आई है,हर जगह लॉ एंड ऑर्डर कायम है। हालांकि विपक्ष आंकड़ों के जरिये इस मुद्दे पर भी सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।
मुद्दा नंबर-3
महंगाई डायन भी कर सकती है खेल?
एक वक्त था,जब महंगाई के चलते सरकारें गिर जाया करती थी,लेकिन पिछले कुछ चुनावों में ये मुद्दा विपक्ष के लिए ब्रह्मास्त्र का काम नहीं कर रहा है। हालांकि महंगाई डायन लगातार बढ़ रही है।बावजूद इसके विपक्ष इस मुद्दे को उस तरह हवा नहीं दे पा रहा है,जैसे उसे देना चाहिए।इसमें दो राय नहीं है कि, विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बनाएगा,लेकिन जनता इसे कितना सीरियस लेगी,ये भविष्य के गर्भ में छिपा है।
मुद्दा नंबर-4
नाराज किसान सरकार के लिए टेंशन?
जैसा कि,हम जानते हैं कि, किसी भी राज्य में किसान चुनाव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।यूपी में भी इस बार किसानों पर सबकी नजर है। हालांकि सरकार किसानों को खुश करने का हर तरीका अपना रही है। लेकिन फसलों के न्यूतम समर्थन मूल्य को लेकर किसानों का एक धड़ा अभी भी सरकार से नाराज नजर आ रहा है। एमएसपी के साथ ही खाद और बीजों की हर साल होती किल्लत भी किसानों की नाराजगी बढ़ा रही है। जिससे ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि, हो सकता है किसानों का एक वर्ग इस बार योगी सरकार के खिलाफ वोट दें।
मुद्दा नंबर-5
विकास की गाड़ी में खो रही मूलभूत सुविधायें!
एक तरफ सरकार विकास की गाड़ी सरपट दौड़ा रही है। एक्सप्रेस-वे,एयरपोर्ट,मेट्रो,हाइवे,मेडिकल कॉलेज,जैसे बड़े विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं,लेकिन दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर कई जिलों में जनता सड़क,बिजली,पानी,शिक्षा के लिए भी तरस रही है। लिहाजा ऐसी जनता योगी सरकार के खिलाफ वोट कर सकती है।
मुद्दा नंबर-6
जातीय समीकरण रहेगा बड़ा मुद्दा?
यूपी का चुनाव हो और जाति की बात न हो,ऐसा हो ही नहीं सकता।इस बार भी विधानसभा चुनाव में जाति का मुद्दा हावी रहेगा। हालांकि सीएम योगी जाति के मुद्दे को गौड़ करने के लिए,बटेंगे तो कटेंगे का नारा देते रहते हैं। और इसका असर भी होता दिखाई पड़ रहा है। बावजूद इसके जाति का मुद्दा हमेशा हर चुनाव में उठता है। खासकर समाजवादी पार्टी और बीएसपी जाति के मुद्दों को उठाकर बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करती है। इस बार भी विपक्ष ने इसकी पूरी तैयारी कर रखी है। अखिलेश का पीडीए इसी मिशन का हिस्सा है। कांग्रेस भी इसी राह पर पिछले कुछ सालों से चलती दिखाई पड रही है।
मुद्दा नंबर-7
महिला वोट निभाएगा निर्णायक रोल?
पिछले कुछ चुनावों से हम देख रहे हैं कि,महिलाएं चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। और सरकार को बहुमत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। लिहाजा इस चुनाव में भी महिला वोट बैंक पर सबकी नजर रहेगी।बता दें कि, यूपी में 6 करोड़ से महिला मतदाता हैं। यानि इस बार भी सत्ता की चाबी महिलाओं के पास रह सकती है।
मुद्दा नंबर-8
योगी के मुकाबले अखिलेश कहां खड़े?
किसी भी चुनाव में चेहरा बड़ा रोल निभाता है। बीजेपी के पास जहां सीएम योगी जैसा चेहरा है। जो माफिया राज खत्म करने और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर जनता के बीच काफी लोकप्रिय हैं। वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव हैं, जिनके राज में गुंडों-माफियाओं के हौसले बुलंद होते थे। माता-बहनें खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती थीं।कांग्रेस इस दौड़ में बहुत पीछे है, क्योंकि वो बैशाखी के सहारे ही यूपी में चलेगी। और बीएसपी के पास केवल मायावती ही हैं, जिनकी पार्टी पिछले कई सालों से चुनावों में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर रही है।लिहाजा इस मामले में बीजेपी सब पर भारी पड़ती दिखाई पड़ रही है।
कुल मिलाकर कहा जाए तो यूपी विधानसभा चुनाव में कई मुद्दे हावी रहेंगे,लेकिन अंतिम फैसला जनता को करना है। अब तो ये आने वाला वक्त बताएगा कि,यूपी की जनता किसको सिंहासन पर बैठाती है,और किसे सत्ता से हटाती है।
Written By: Geeta Sharma










