
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को उनके आमरण अनशन स्थल से हटाए जाने की घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। अखिलेश यादव ने कहा कि इस घटना की खबर कुछ ही समय में पूरे देश और दुनिया में फैल गई है। जिसके कारण लोगों में गहरी चिंता और सरकार के प्रति आक्रोश देखने को मिल रहा है।
सादी वर्दी में कार्रवाई करने वालों की पहचान सार्वजनिक करने की मांग
अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग सादी वर्दी में इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए अचानक अनशन स्थल पर पहुंचे और सोनम वांगचुक को वहां से ले गए, उनकी पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी कार्रवाई में पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है, जिससे लोगों के मन में संदेह और बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी कार्रवाई को पूरी जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए।
‘न्यायिक निगरानी’ में हो सोनम वांगचुक का इलाज
सपा अध्यक्ष ने मांग की कि सोनम वांगचुक की चिकित्सा न्यायिक निगरानी में कराई जाए ताकि उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार की आशंका समाप्त हो सके। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान, नवाचार, लोकतांत्रिक मूल्यों और युवाओं के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं हो सकती।
सरकार की कार्रवाई से देश की वैश्विक छवि प्रभावित
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि इस घटना के बाद देश और दुनिया की निगाहें भारत सरकार पर टिक गई हैं। उनके अनुसार, भाजपा सरकार की इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मानवीय और लोकतांत्रिक छवि को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन सरकार दमनात्मक रवैया अपनाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को कमजोर कर रही है।
‘भाजपा संवाद नहीं, विवाद की राजनीति करती है’
सपा प्रमुख ने भाजपा की विचारधारा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने कभी महात्मा गांधी के विचारों और उनके अहिंसक, संवाद आधारित राजनीतिक दृष्टिकोण को नहीं अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति संवाद के बजाय विवाद और टकराव पर आधारित है। उनके अनुसार, सरकार असहमति की आवाजों को दबाने का प्रयास करती है। जहां भी सामाजिक एकता तथा सौहार्द दिखाई देता है, वहां उसे कमजोर करने की कोशिश की जाती है।
डिजिटल युग में विचारों को दबाना संभव नहीं
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा यह भूल रही है कि आज का दौर डिजिटल माध्यमों का है, जहां विचारों को बलपूर्वक दबाना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी सोशल मीडिया के जरिए वैचारिक रूप से अधिक जुड़ी हुई है और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति सजग भी है। उनके अनुसार, विचारों की ताकत किसी भी दमनकारी कार्रवाई से अधिक प्रभावशाली होती है। भविष्य में भी लोकतांत्रिक आवाजें इसी तरह मजबूती से उठती रहेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि समाज में संवाद, लोकतंत्र और जनभागीदारी की भावना आगे भी मजबूत होती रहेगी।
Written By: एम अतहर उद्दीन मुन्ने भारती















