
लखनऊ स्थित अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में जमीयत उलमा-ए-हिन्द उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में हिंदू-मुस्लिम एकता सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न धर्मों के प्रमुख प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, विधि विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सांप्रदायिकता, नफ़रत और सामाजिक विभाजन के विरुद्ध एक साझा मंच तैयार करना तथा देश में भाईचारे, प्रेम और पारस्परिक सम्मान के वातावरण को मजबूत करना था।
मौलाना अरशद मदनी ने जताई सामाजिक हालात पर चिंता
सम्मेलन को संबोधित करते हुए जमीयत उलमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश में बढ़ती सांप्रदायिकता और नफ़रत का माहौल चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पहले केवल मुसलमानों को निशाना बनाया जाता था, लेकिन अब इस्लाम भी हमलों के केंद्र में है। उन्होंने इस स्थिति को बदलने के लिए समाज के सभी वर्गों से आगे आने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, 'नफरत की आंधियों में हम मोहब्बत के चिराग जलाना चाहते हैं।' उनके अनुसार यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देशव्यापी सामाजिक अभियान का पहला चरण है, जिसका उद्देश्य विभिन्न धर्मों के लोगों को एक मंच पर लाकर नफ़रत के खिलाफ संगठित करना है।
इतिहास से प्रेरणा लेने का आह्वान
मौलाना मदनी ने स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेज़ों के विरुद्ध पहली प्रभावी आवाज़ धार्मिक नेतृत्व से उठी थी और बाद में वह जनआंदोलन में बदल गई। उन्होंने विश्वास जताया कि आज सांप्रदायिकता के खिलाफ उठी यह आवाज़ भी भविष्य में व्यापक जनसमर्थन प्राप्त करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमीयत उलमा-ए-हिन्द एक धार्मिक एवं सामाजिक संगठन है, जिसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है। संगठन का उद्देश्य केवल राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और मानवता की सेवा है।
मानवता की सेवा को बताया संगठन की पहचान
मौलाना मदनी ने केरल और पंजाब में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान संगठन द्वारा किए गए राहत कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सहायता कार्यों में कभी धर्म या समुदाय के आधार पर भेदभाव नहीं किया गया। उन्होंने असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से जुड़े मामलों में कानूनी सहायता का भी जिक्र किया और कहा कि संगठन ने सभी प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयास किए।
शिक्षा और युवाओं के मुद्दों पर भी बोले मदनी
अपने संबोधन में मौलाना मदनी ने लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई।
रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन ऐसी कार्रवाई से छात्रों का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।
महंत डॉ. बिशंभर नाथ मिश्र का समर्थन
सम्मेलन के मुख्य अतिथि और वाराणसी के संकट मोचन हनुमान मंदिर के महंत डॉ. बिशंभर नाथ मिश्र ने कहा कि भारत की आज़ादी में सभी समुदायों का समान योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ प्रत्येक नागरिक को खुलकर आवाज़ उठानी चाहिए। उन्होंने मौलाना अरशद मदनी द्वारा शुरू किए गए अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि देश में सामाजिक सौहार्द और न्याय की स्थापना के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।
इंदिरा जय सिंह ने संविधान और लोकतंत्र पर दिया जोर
सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है और किसी भी प्रकार के भेदभाव की अनुमति नहीं देता। उन्होंने सम्मेलन को राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
उन्होंने कहा कि विभिन्न धर्मों के लोगों की एकजुटता यह साबित करती है कि भारत की सामाजिक एकता को कमजोर नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने चिंता जताई कि लोकतंत्र को दिशा देने वाला बुद्धिजीवी वर्ग कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मौन दिखाई देता है।
घोषणा-पत्र के माध्यम से देशव्यापी अभियान का ऐलान
सम्मेलन के संयोजक एवं जमीयत उलमा-ए-हिन्द के उपाध्यक्ष मौलाना असजद मदनी ने अभियान का घोषणा-पत्र प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित लोगों ने समर्थन दिया। उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक सामाजिक अभियान है, जिसके तहत देशभर में विभिन्न धर्मों, समुदायों और सामाजिक वर्गों के बीच संवाद, विश्वास और सहयोग बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश अपने परिवार, मोहल्लों, शिक्षण संस्थानों और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाएं।
साझी संस्कृति और भाईचारे पर रहा सम्मेलन का केंद्र
प्रांतीय अध्यक्ष मौलाना अशहद रशीदी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मेलन भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रेम और पारस्परिक सम्मान ही समाज को मजबूत बना सकते हैं।
सम्मेलन में बौद्ध, ईसाई और सिख समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक सद्भाव, संवाद और पारस्परिक विश्वास को मजबूत करने की आवश्यकता है तथा इस दिशा में ऐसे प्रयास समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Written By: एम अतहर उद्दीन मुन्ने भारती















