भोजशाला परिसर के बाहर नमाज की जगह को लेकर फिर विवाद, मुस्लिम पक्ष जाएगा सुप्रीम कोर्ट

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार विवाद भोजशाला परिसर के बाहर जुमे की नमाज के लिए तय की गई वैकल्पिक जगह को लेकर है।

13 घंटे पहले

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मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार विवाद भोजशाला परिसर के बाहर जुमे की नमाज के लिए तय की गई वैकल्पिक जगह को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने मुस्लिम समुदाय के लिए हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करने के लिए अस्थायी व्यवस्था की है। हालांकि, प्रशासन द्वारा तय की गई जगह को लेकर मुस्लिम पक्ष ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि अदालत ने भोजशाला परिसर के समीप या उससे सटी हुई जगह पर नमाज की व्यवस्था करने को कहा था, जबकि प्रशासन ने लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित 'चालीस पीर' परिसर की जमीन उपलब्ध कराई है।

बैठक के बाद तय हुई वैकल्पिक जमीन

शुक्रवार को जिला प्रशासन और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद प्रशासन ने ग्राम मालीवाड़ा के सर्वे क्रमांक 664 की जमीन, जो चालीस पीर परिसर के पास स्थित है, नमाज के लिए निर्धारित की। प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध विकल्पों में यह सबसे निकट और उपयुक्त भूमि थी। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट में मामले की अंतिम सुनवाई होने तक अस्थायी रूप से लागू रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को निर्धारित है।

प्रशासन का पक्ष

धार के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) ने बताया कि प्रशासन ने सभी कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या यह जमीन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के 300 मीटर के संरक्षित दायरे में आती है। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार यह क्षेत्र संरक्षित सीमा से बाहर है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 300 मीटर के भीतर कोई उपयुक्त सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं थी। एडीएम ने बताया कि निर्णय बैठक समाप्त होने के लगभग एक घंटे पहले लिया गया था और इसकी जानकारी मुस्लिम पक्ष को दे दी गई थी।

मुस्लिम पक्ष ने फैसले पर उठाए सवाल

मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने प्रशासन के फैसले को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या बताया है। उनका कहना है कि अदालत ने स्पष्ट रूप से कमाल मौला मस्जिद परिसर के बगल या उससे सटी हुई जगह पर नमाज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। इसके विपरीत प्रशासन ने लगभग दो किलोमीटर दूर स्थान आवंटित कर दिया, जो अदालत की भावना के अनुरूप नहीं है।

 अब्दुल समद ने आरोप लगाया कि लगभग 700 वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा को इस निर्णय के माध्यम से बाधित किया जा रहा है और मुस्लिम समाज के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में लिखित आपत्ति जिला प्रशासन को सौंप दी गई है तथा सभी याचिकाकर्ताओं और अधिवक्ताओं से चर्चा के बाद इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

चालीस पीर परिसर में नमाज पढ़ने से किया इनकार

मुस्लिम समाज ने स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल चालीस पीर परिसर में जुमे की नमाज अदा नहीं करेगा। अब्दुल समद ने कहा कि समुदाय का मुख्य उद्देश्य कमाल मौला मस्जिद परिसर के निकट नमाज अदा करना है, जैसा कि उनके अनुसार अदालत के निर्देशों में उल्लेखित है। उन्होंने कहा कि समुदाय किसी वैकल्पिक स्थान को स्थायी समाधान के रूप में स्वीकार नहीं करेगा।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस तैनात

विवाद को देखते हुए धार जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क है। बैठक के बाद उत्पन्न स्थिति को ध्यान में रखते हुए भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डाबर ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 300 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

अंतिम सुनवाई पर टिकी निगाहें

भोजशाला परिसर से जुड़े इस विवाद में अब सभी पक्षों की नजर सुप्रीम कोर्ट की 5 अगस्त 2026 को होने वाली अंतिम सुनवाई पर टिकी है। प्रशासन फिलहाल अदालत के निर्देशों के अनुरूप अस्थायी व्यवस्था लागू होने का दावा कर रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे आदेश की गलत व्याख्या बताते हुए न्यायालय में दोबारा चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में आगामी सुनवाई इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

 Written By: Geeta Sharma 

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