यूपी में अमित शाह का 'मिशन-2027', 4 कैटेगरी और जीत पक्की

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अभी से अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार कर ली है।

8 घंटे पहले

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उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अभी से अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार कर ली है। जिसमें हर सीट का अलग-अलग आकलन किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आने वाले समय में ब्रज और बुंदेलखंड संभाग से चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद वे प्रदेश के सभी छह क्षेत्रों का दौरा करेंगे और संगठन के साथ लगातार बैठकें करेंगे। बीजेपी का इस बार स्पष्ट संदेश है कि विधानसभा टिकट केवल पुराने राजनीतिक संबंधों या वरिष्ठता के आधार पर नहीं, बल्कि जीत की संभावना और संगठनात्मक प्रदर्शन के आधार पर दिए जाएंगे।

121 हारी हुई सीटों पर विशेष फोकस

2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 376 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से उसे 255 सीटों पर जीत मिली थी। यानी पार्टी 121 सीटों पर हार गई थी। हालांकि सहयोगी दलों के साथ मिलकर एनडीए ने कुल 273 सीटें जीती थीं। अब पार्टी इन 121 सीटों का विस्तृत विश्लेषण कर रही है। खास तौर पर उन 49 सीटों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां जीत और हार का अंतर 5,000 वोटों से भी कम था। पार्टी का मानना है कि मजबूत बूथ प्रबंधन, बेहतर संगठन और प्रभावी उम्मीदवार चयन के जरिए इन सीटों को दोबारा जीता जा सकता है।

सीटों को 4 कैटेगरी में बांटकर बनेगी रणनीति

बीजेपी ने इस बार विधानसभा सीटों को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटने का फैसला किया है, ताकि प्रत्येक सीट के लिए अलग चुनावी रणनीति बनाई जा सके।

A कैटेगरी में वे सीटें रखी गई हैं, जहां पार्टी लगातार पिछले 3 विधानसभा चुनाव जीतती रही है।

B कैटेगरी में वे सीटें शामिल हैं, जहां बीजेपी जीत तो रही है, लेकिन बहुत कम अंतर से।

C कैटेगरी में ऐसी सीटें रखी गई हैं, जहां पार्टी लगातार 2 चुनावों से मामूली अंतर से हार रही है।

D कैटेगरी में वे सीटें शामिल हैं, जिन्हें सपा और कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। इन सीटों पर संगठन, सामाजिक समीकरण और उम्मीदवार चयन को लेकर अलग रणनीति अपनाई जाएगी।

61 सबसे कठिन सीटों पर भी रहेगा खास ध्यान

बीजेपी की रणनीति में उन 61 विधानसभा सीटों को भी प्राथमिकता दी गई है, जहां पार्टी 2012, 2017 और 2022—तीनों चुनावों में जीत दर्ज नहीं कर सकी। इन क्षेत्रों में बूथ स्तर से लेकर जातीय समीकरण, लाभार्थी संपर्क अभियान और संभावित उम्मीदवारों का नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा। पार्टी का लक्ष्य इन सीटों पर संगठन को मजबूत करने के साथ स्थानीय मुद्दों के आधार पर चुनावी माहौल तैयार करना है।

टिकट वितरण में बदलेगा पैमाना

सूत्रों के अनुसार, बीजेपी उन नेताओं का भी पूरा चुनावी रिकॉर्ड खंगाल रही है जो 3 या उससे अधिक बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। उनके पिछले चुनावों में जीत-हार का अंतर, अपने बूथों पर प्रदर्शन, संगठन में सक्रियता और जनाधार का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि किसी नेता की जीत की संभावना कमजोर मानी जाती है तो पार्टी नए चेहरे को मौका देने से भी पीछे नहीं हटेगी। यानी इस बार टिकट का सबसे बड़ा आधार केवल जीतने की क्षमता होगी।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद भी चुनौती

बीजेपी के सामने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं का विवाद भी एक राजनीतिक चुनौती बनकर उभरा है। मामले में जांच, गिरफ्तारियों और ट्रस्ट स्तर पर संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया शुरू हुई है। ट्रस्ट में सीईओ पद बनाने सहित कई प्रशासनिक सुधारों पर भी काम किया जा रहा है। राम मंदिर बीजेपी की वैचारिक और राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ऐसे में विपक्ष इस मुद्दे को चुनावी बहस का हिस्सा बनाने की कोशिश कर सकता है।

विपक्ष भी कर रहा है तैयारी

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी आगामी चुनाव को लेकर सक्रिय हो गए हैं। पार्टी रथ यात्रा और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के जरिए जनता के बीच पहुंचने की तैयारी कर रही है। वहीं कांग्रेस भी प्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करने और चुनावी अभियान तेज करने में जुटी हुई है। ऐसे में 2027 का चुनाव केवल सत्ता बचाने का नहीं, बल्कि हर सीट पर अलग रणनीति और मजबूत संगठनात्मक मुकाबले का चुनाव बनने जा रहा है।

जीत की क्षमता होगी सबसे बड़ा आधार

बीजेपी का 'मिशन-2027' अब केवल चुनावी नारा नहीं बल्कि सीटवार चुनावी अभियान का रूप ले चुका है। पार्टी एक ओर 121 हारी हुई सीटों की वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही है तो दूसरी ओर 61 कठिन सीटों पर भी विशेष रणनीति बना रही है। करीबी हार वाली सीटों पर संगठन को मजबूत करने के साथ टिकट वितरण में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अमित शाह का संदेश स्पष्ट है कि 2027 विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों का चयन केवल राजनीतिक अनुभव या पुराने रिश्तों के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी जीत की संभावना, संगठनात्मक क्षमता और जनस्वीकृति को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

Written By: Geeta Sharma

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