
बिहार में 211 नए सरकारी डिग्री कॉलेजों के उद्घाटन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने एनडीए सरकार पर राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बदहाल करने का आरोप लगाया है, उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में की जा रही घोषणाएं केवल कागजों और विज्ञापनों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर छात्रों को जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
11 नए डिग्री कॉलेजों के उद्घाटन पर राजद का सवाल
राजद प्रवक्ता ने कहा कि 15 जुलाई को मुख्यमंत्री द्वारा राज्यव्यापी समारोह आयोजित कर 211 नए सरकारी डिग्री कॉलेजों का उद्घाटन किया गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि उद्घाटन के बाद इन कॉलेजों में तत्काल पढ़ाई शुरू होनी चाहिए थी, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश कॉलेजों में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही संसाधन उपलब्ध हैं।
छह विषयों में पढ़ाई शुरू करने का दावा
उन्होंने दावा किया कि सरकार की घोषणा के अनुसार इन नए कॉलेजों में फिलहाल छह विषयों की पढ़ाई शुरू होनी है और कई कॉलेजों में छात्रों का नामांकन भी हो चुका है। इसके बावजूद कई कॉलेजों में दो से अधिक शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि इनमें से एक शिक्षक को प्राचार्य और दूसरे को बर्सर की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा, यह बड़ा सवाल है।
सिर्फ बोर्ड लगाकर उद्घाटन की पूरी की गई औपचारिकता
चित्तरंजन गगन ने आरोप लगाया कि अधिकांश नए कॉलेजों के पास अपना भवन तक नहीं है। आधारभूत संरचना, प्रयोगशाला और आवश्यक उपस्करों की कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कई जगह माध्यमिक विद्यालयों में केवल बोर्ड लगाकर कॉलेज खोलने की औपचारिकता पूरी कर दी गई है।
खाली पदों और संसाधनों की कमी पर राजद का सरकार पर हमला
राजद प्रवक्ता ने कहा कि पहले से स्थापित कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भी शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं। कई संस्थानों में अनुबंध पर शिक्षकों की नियुक्ति कर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई विषयों में तो एक भी स्थायी शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, उन्होंने एनडीए सरकार की पूर्व योजनाओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में खोले गए कई मॉडल स्कूलों में अब तक जरूरत के अनुसार शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसी तरह पंचायत स्तर पर उत्क्रमित किए गए उच्च माध्यमिक विद्यालयों में भी भवन, प्रयोगशाला और शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
सरकार की शिक्षा नीतियों पर सवाल
गगन ने आरोप लगाया कि सरकार की शिक्षा संबंधी सभी घोषणाएं केवल प्रचार तक सीमित हैं। उन्होंने कहा कि "उन्नत शिक्षा-उज्जवल भविष्य" के संकल्प का नाम बदलकर "बर्बाद शिक्षा-बर्बाद भविष्य" कर देना चाहिए।
Written By: M. Athar Uddin Munne Bharti
Edited By : Toshi Shah



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