
अकेलेपन को कम करने के लिए आमतौर पर लोग दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने या कहीं घूमने जाने का सहारा लेते हैं। लेकिन चीन में अब अकेलेपन को दूर करने का एक नया तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जहां लोग इसके लिए पैसे तक खर्च कर रहे हैं। इस नए चलन को ‘कंपेनियनशिप इकॉनमी’ कहा जा रहा है, यानी ऐसी सेवा जहां कोई व्यक्ति कुछ समय के लिए किसी दूसरे व्यक्ति का साथ पाने के लिए उसे हायर करता है। इस व्यवस्था में लोग अनजान लोगों को कुछ घंटों के लिए अपने साथ रहने, बातचीत करने और समय बिताने के लिए बुलाते हैं। इसका उद्देश्य किसी खास समस्या का समाधान करना नहीं, बल्कि लोगों को भावनात्मक सहारा देना और उन्हें अकेलेपन से बाहर निकालना है। कई बार इस सेवा के तहत लोग साथ में घूमने जाते हैं, ट्रैकिंग या हाइकिंग करते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी के अनुभव साझा करते हैं।
कितना बड़ा हो चुका है यह बाजार?
कंपेनियनशिप इकॉनमी के बढ़ने के पीछे बदलती जीवनशैली को बड़ी वजह माना जा रहा है। आज बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई या नौकरी के कारण अपने परिवार से दूर रह रहे हैं। काम का दबाव, सामाजिक दूरी और व्यक्तिगत परेशानियां उन्हें भावनात्मक रूप से अकेला बना रही हैं। ऐसे लोगों को साथ देने के लिए यह सेवा एक नए विकल्प के रूप में सामने आई है। हालांकि इस क्षेत्र से जुड़ा कोई आधिकारिक सरकारी डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन चीनी सरकारी मीडिया के अनुमान के अनुसार वर्ष 2025 तक इस बाजार का आकार लगभग 50 अरब युआन यानी करीब 7.4 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
युवा बन रहे हैं इस नई इमोशनल सर्विस का हिस्सा
इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा भागीदारी छात्रों और युवा गिग वर्कर्स की है। वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे डौयिन और श्याओहोंगशू पर अपनी सेवाओं का प्रचार करते हैं। यह सुविधा केवल काम से परेशान युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि रिश्तों में तनाव झेल रहे लोगों, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से गुजर रहे व्यक्तियों और भावनात्मक सहारे की जरूरत महसूस करने वाले लोगों तक भी पहुंच रही है।
चीन में अकेलेपन की बढ़ती समस्या
विशेषज्ञों के अनुसार चीन में अकेलेपन की समस्या के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं। युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी ने भी इस स्थिति को प्रभावित किया है। कई शिक्षित युवा स्थायी नौकरी न मिलने के कारण अस्थायी काम या गिग वर्क की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा चीन की पुरानी एक-बच्चा नीति का भी सामाजिक प्रभाव देखने को मिला है। कई परिवारों में बच्चों के भाई-बहन नहीं होने के कारण कुछ लोगों के पास बचपन से ही सीमित सामाजिक जुड़ाव रहा। समय के साथ यह स्थिति अकेलेपन की भावना को बढ़ाने वाली साबित हुई।
अजनबियों से बातचीत का बढ़ता चलन
आज के कई युवा अपनी निजी परेशानियां परिवार या दोस्तों से साझा करने में झिझक महसूस करते हैं। ऐसे में किसी ऐसे व्यक्ति से बात करना, जो उन्हें पहले से नहीं जानता और बिना किसी फैसले के उनकी बातें सुन सके, उन्हें आसान विकल्प लगता है। इसी जरूरत ने चीन में कंपेनियनशिप इकॉनमी को जन्म दिया है। आने वाले समय में यह ट्रेंड केवल चीन तक सीमित रहेगा या दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी अपनी जगह बनाएगा, यह देखने वाली बात होगी।
Written By Toshi Shah















