
यूपी की सियासत में इस वक्त केवल एक ही सवाल हर नुक्कड़,हर चौराहे,हर चाय-पान की दुकान पर गूंज रहा है। उत्तर प्रदेश चुनाव में इस बार क्या होगा?क्या जनता 10 साल से वनवास झेल रहे समाजवादी पार्टी को मौका देगी,या फिर बुलडोजर बाबा का विकास मॉडल बाजी मार ले जाएगा।भारतीय जनता पार्टी जहां यूपी में तीसरी बार कमल खिलाकर हैट्रिक लगाने के लिए बेकरार है। वहीं सपा बीजेपी के इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए बड़ा सियासी दांव तैयार कर रही है।चलिए विस्तार से समझते हैं कि,आखिर इस बार यूपी के सियासी दंगल में क्या खिचड़ी पक रही है?
चुनावी मैदान मारने के लिए सपा की रणनीति क्या?
समाजवादी पार्टी जानती है कि, बीजेपी का सबसे बड़ा वोट बैंक हिंदू हैं। लिहाजा उसकी पहली कोशिश बीजेपी के कोर वोटरों को छटकाना है। इसके लिए पार्टी ने दांव चलना भी शुरू कर दिया है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर पार्टी जनता को ये बताने की कोशिश कर रही है कि, बीजेपी का हिंदू प्रेम केवल दिखावा है।और असल में उसके शासनकाल में भगवान के चढ़ावे को भी बख्शा नहीं जाता।अगर देखा जाए तो सपा अपने इस दांव में कहीं न कहीं कामयाब होती दिखाई पड़ रही है। आज हर शख्स के जुबान पर राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा चढ़ा हुआ है,और इसके लिए कहीं न कहीं वो सरकार को जिम्मेदार मानता है।ये बात अलग है कि,सरकार इसे लेकर विपक्ष को ही कटघरे में खड़ा करने में जुटी है।
अखिलेश अपना दूसरा दांव 2024 में कमाल करने वाले PDA के जरिये चल रहे हैं।सपा अपने हर रैली,प्रेस कॉन्फ्रेंस में PDA का राग अलापती रहती है।ओबीसी और दलितों के हक की बात करती रहती है।जातीय जनगणना का मुद्दा उठाकर समाजवादी पार्टी ये दिखाना चाहती है कि, वो इस समाज के हक की लड़ाई लड़ रही है।AIMIM जैसे मुस्लिम केंद्रित दलों के आने से इस समुदाय का जो वोट कट जाता है। उसे भी समाजवादी पार्टी अपने पाले में रखने की पूरजोर कोशिश कर रही है।
बीजेपी विरोधी दलों को साथ रखने की कोशिश
यूपी का चुनावी किला फतह करने के लिए समाजवादी पार्टी हर वो रणनीति तैयार कर रही है,जो उसे जीत की दहलीज तक ले जाए। इसके लिए वो उन सभी दलों को अपने साथ रखने की कोशिश कर रही है,जो बीजेपी के विरोधी हैं।हालांकि चुनाव से पहले ही अखिलेश की इस रणनीति को कांग्रेस झटका देती हुई दिखाई पड़ रही है। हाल ही में ऐसी कुछ खबरें भी आई थी कि, इस बार कांग्रेस सपा से ज्यादा सीटों की डिमांड कर सकती है।शायद इसलिए कांग्रेस खुलकर कह रही है कि, वो यूपी की सभी विधानसभा सीटों के लिए तैयारी कर रही है।सपा के साथ जुड़ने वाले दूसरे दल भी ज्यादा सीट पाने के लिए ऐसी रणनीति का हथकंडा अपना सकते हैं।लिहाजा अखिलेश के लिए इन सभी दलों को संतुष्ट करना बड़ी चुनौती होगी।
बेरोजगारी होगी सपा का तगड़ा हथियार
बीजेपी ने जब से सूबे की सत्ता संभाली है,बेरोजगारी बढ़ती जा रही है,सरकारी नौकरियां घट रही हैं,और प्राइवेट में मारामारी चल रही है।पेपर लीक होने के चलते तैयारी कर रहे छात्रों को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।बीजेपी की इस कमजोर कड़ी को समाजवादी पार्टी अपना सबसे मजबूत हथियार बनाने की तैयारी कर रही है। समाजवादी नेता हर जगह पर बीजेपी सरकार की इस कमजोरी को उजागर करते रहते हैं,और जनता को ये भरोसा दिलाते रहते हैं कि,अखिलेश की सरकार आने पर सबके पास नौकरियां होंगी।
सीएम योगी के विरोधियों को साधना
समाजवादी पार्टी की कोशिश योगी सरकार के अंदर काम कर रहे उन नेताओं को साधने की होगी,जो प्रत्यक्ष नहीं लेकिन परोक्ष रूप से योगी के विरोधी हैं।और जो किसी भी कीमत पर सीएम योगी को सत्ता से हटाना चाहते हैं। ऐसे लोगों की बीजेपी में एक लंबी फेहरिस्त है,जिसमें केशव प्रसाद मौर्या का नाम सबसे आगे हैं। लिहाजा समाजवादी पार्टी सरकार की कोशिश होगी कि,वो ऐसे नेताओं के जरिये योगी जी की चुनावी रणनीति में सेंध लगाने का काम करे।
सपा का सपना तोड़ने के लिए बीजेपी भी तैयार
समाजवादी पार्टी जहां यूपी चुनाव में बीजेपी का सिंहासन हिलाने की तैयारी कर रही है।वहीं दूसरी तरफ बीजेपी को सीएम योगी के बुलडोजर मॉडल पर पूरा भरोसा है।पार्टी नेताओं का कहना है कि, यूपी की जनता योगी जी के साथ ही रहना चाहती है,लिहाजा समाजवादी पार्टी को ख्याली पुलाव पकाना छोड़ देना चाहिए।इसमें दो राय नहीं है कि,सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को चाक-चौबंद कर रखा है।जिसकी जनता भी कायल है।खासकर व्यापारी वर्ग और महिला सुरक्षा को लेकर योगी सरकार ने बेहतरीन काम किया है,जो उसकी बड़ी यूएसपी है।अपराधियों पर बुलडोजर एक्शन और दंगामुक्त प्रदेश की छवि के दम पर बीजेपी हर वर्ग को अपने साथ खींचने में सफल रही है।
डबल इंजन सरकार का होगा फायदा!
उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार होने से विकास की गाड़ी सरपट दौड़ती रहती है।केंद्र और राज्य की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी अधिक से अधिक लोगों को मिलता है। जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी का वोटबैंक मजबूत होता है।ऐसे में आधी आबादी जाति और धर्म से ऊपर उटकर वोट देती है।
यूपी चुनाव किसके लिए बड़ी जंग?
2027 में यूपी का चुनावी दंगल कौन जीतेगा?इसका जवाब उत्तर प्रदेश की सियासी फिजा में ही छिपा है।लेकिन एक बात तो तय है कि,यदि विपक्ष पूरी तरह एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा,तो बीजेपी के लिए चुनौती हो सकती है। हालांकि विधानसभा चुनाव क्षेत्रीय मुद्दों पर लड़ा जाता है।लिहाजा ये मुद्दे बीजेपी को ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगे इसकी उम्मीद कम है।दूसरे यूपी में सीएम योगी के शासन की आज पूरे भारत में उपमा दी जाती है।लोग योगी जी जैसे सीएम की डिमांड करते हैं।लिहाजा बीजेपी का किला सपा ढहा पाएगी इसकी उम्मीद कम नजर आती है।अब तो ये आने वाला वक्त बताएगा कि, आखिर योगी को सत्ता से हटाने के लिए सपा कौन सा चक्रव्यूह तैयार करती है। और कौन घर के भेदी बनता है।`
Written By Toshi Shah






