
UPElection2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का बिगुल भले ही अभी न बजा हो। लेकिन इसकी बिसात अभी से बिछाई जाने लगी है। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव के फॉर्मूले पर ही विधानसभा चुनाव जीतने का ख्वाब देख रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अखिलेश के PDA वाले चक्रव्यूह को ध्वस्त करने के लिए सीएम योगी भी बुलडोजर लेकर तैयार बैठे हैं।विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को मात देने के लिए सीएम योगी न केवल जातिगत समीकरणों को साध रहे हैं।बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी इस दिशा में काम कर रहे हैं।आइए जानते हैं कि, आखिर कैसे 2027 के चुनाव में सीएम योगी अखिलेश को मात देंगे?और इसके लिए सीएम योगी का महाप्लान क्या है?
योगी मंत्रिमंडल में सोशल इंजीनियरिंग का गणित
यूपी विधानसभा चुनाव में हैट्रिक लगाने के लिए सीएम योगी हर वो सियासी दांव चल रहे हैं,जो उन्हें जीत की दहलीज पर ले जा सकता है।हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में सीएम योगी ने अपने इसी दांव की एक बानगी दिखाई। जिसमें सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले के तहत सरकार में पिछड़े और दलित समाज के चेहरों को न केवल शामिल किया गया,बल्कि उन्हें अहम जिम्मेदारियां भी दी गईं।वर्तमान में अगर योगी सरकार के स्वरूप को देखा जाए तो लगभग 25 ओबीसी और 10 दलित चेहरे के साथ सर्वण समाज को भी कुछ जगह दी गई है।सीएम योगी का ये कदम अखिलेश के उन दावों की हवा निकालता है कि,बीजेपी में पिछड़े और दलितों की उपेक्षा की जाती है।
संगठन में भी दिख रहा सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला
सरकार के साथ संगठन में भी बीजेपी ऐसा बदलाव कर रही है,जिससे अखिलेश के चुनावी PDA की हवा निकल जाए।इसके लिए बीजेपी ने अपने छह प्रमुख संगठनात्मक मोर्चों में से ज्यादातर की कमान पिछड़ों और दलितों को दे दी है।बीजेपी के इस कदम की चर्चा शहरों की गलियों से गांव के चौपालों तक हो रही है।बीजेपी अपने इन नेताओं के जरिये केंद्र और राज्य की कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का काम कर रही है। साथ ही उन्हें भी बता रही है कि, भय मुक्त और शासन केवल योगी राज में ही संभव है। समाजवादी सरकार आते ही सूबे में फिर से गुंडाराज कामय हो जाएगा।
हिंदुत्व की पिच पर खुलकर बैटिंग कर रहे योगी
सीएम योगी की सबसे बड़ी ताकत उनकी प्रखर हिंदूवादी छवि है।समाजवादी पार्टी के जातिगत ध्रुवीकरण के दांव को बीजेपी सीएम योगी के इसी अस्त्र से भेदने की तैयारी कर रही है।सीएम योगी ने हाल ही में अपने बयानों से ये साफ कर दिया है कि,बीजेपी अपनी बुनियादी विचारधारा से पीछे हटने वाली नहीं है।अपने बयानों के जरिये सीएम योगी जनता को ये बता भी रहे हैं कि, किस तरह सपा के शासनकाल में कार सेवकों पर गोलियां चलवाई गईं।और आज वही लोग राम प्रेम के ढोंग का दिखावा कर रहे हैं।सीएम योगी के ऐसे बयान हिंदूवोट बैंक को एकजुट करने का काम कर रहे हैं।
कानून-व्यवस्था और भयमुक्त शासन का वादा
उत्तर प्रदेश में माफिया मुक्त कानून-व्यवस्था अब बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है।सीएम योगी की बुलडोजर बाबा वाली छवि और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई से जनता के बीच उनकी छवि एक कुशल प्रशासक की है।जो माफियाओं और बदमाशों पर नकेल कसकर रखता है। 2027 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी इस नैरेटिव को भुनाने के लिए पूरी तैयारी कर रही है।इसलिए सीएम योगी अपनी हर जनसभा में सपा सरकार के गुंडाराज का जिक्र करना नहीं भूलते हैं।महिलाओं की सुरक्षा और व्यापारियों के लिए अनुकूल माहौल को भारतीय जनता पार्टी अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, जो कि समाजवादी पार्टी के पारंपरिक वोटर्स के बीच भी सेंध लगाने का काम कर रहा है।
सपा का मुस्लिम प्रेम बिगाड़ेगा काम!
अखिलेश के ‘PDA’ की सबसे कमजोर कड़ी है, ‘A’यानि अल्पसंख्यक।समाजवादी पार्टी के मुस्लिम प्रेम के कारण कई वर्ग अब इससे दूरी बना रहे हैं।खासकर गैर मुस्लिम वर्ग सपा से दूर होता दिखाई पड़ रहा है। अखिलेश के कोर वोटर कहे जाने वाला यादव वर्ग भी इसी कड़ी में पिछले कुछ चुनावों से शुमार होता दिखाई पड़ रहा है।
2027 का महामुकाबला होगा दिलचस्प
कुल मिलाकर कहा जाए तो यूपी में 2027 का महामुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है। एक तरफ बीजेपी का सोशल इंजीनियरिंग है,तो दूसरी तरफ सपा का पीडीए।अब ये तो आने वाला वक्त बताएगा कि,जनता सीएम योगी को हैट्रिक लगाने का मौका देती है या फिर उनके विजय रथ को रोककर साइकिल की सवारी करना पसंद करती है।
Written By: Geeta Sharma


