
देश में महंगाई एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ाने लगी है। जून महीने में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि मई में यह 3.93 प्रतिशत थी। सरकार द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में लगातार इजाफा होना है। महंगाई बढ़ने से आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है और रोजमर्रा के खर्च पहले की तुलना में अधिक हो गए हैं।
खाद्य महंगाई ने बढ़ाई परेशानी
जून में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 5.32 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि मई में यह 4.78 प्रतिशत थी। सब्जियां, दालें, फल, दूध और अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली। इसका सीधा असर आम परिवारों की जेब पर पड़ रहा है, क्योंकि इन वस्तुओं की खपत हर घर में रोजाना होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आने वाले महीनों में भी बनी रह सकती है।
मिडिल ईस्ट तनाव और तेल की कीमतों का असर
महंगाई बढ़ने के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। तेल महंगा होने से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि होती है, जिससे परिवहन लागत बढ़ जाती है। जब ट्रांसपोर्ट महंगा होता है तो उसका असर सब्जियों, फलों, अनाज और अन्य जरूरी सामान की कीमतों पर भी दिखाई देता है।
RBI के सामने महंगाई नियंत्रित करने की चुनौती
महंगाई को नियंत्रित रखने की जिम्मेदारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास है। सरकार ने RBI को निर्देश दिया है कि खुदरा महंगाई को 4 प्रतिशत के आसपास बनाए रखा जाए। हालांकि, निर्धारित लक्ष्य के अनुसार महंगाई 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है। खाद्य महंगाई में तेजी आने से अब RBI के सामने कीमतों को नियंत्रित रखने और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने की चुनौती और कठिन हो गई है।
मानसून भी बढ़ा सकता है दबाव
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में मानसून भी महंगाई को प्रभावित कर सकता है। बारिश के मौसम में कई बार सब्जियों और फलों की आपूर्ति प्रभावित होती है, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ जाती हैं। कई क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था बाधित होने से सामान की उपलब्धता कम हो जाती है और इसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ता है। यदि मानसून सामान्य से कमजोर या अत्यधिक बारिश वाला रहा तो खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है।
आने वाले समय में क्या हैं संकेत?
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए निकट भविष्य में महंगाई पर दबाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और घरेलू बाजार में खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो रोजमर्रा के सामान और महंगे हो सकते हैं। ऐसे में सरकार और RBI दोनों के लिए महंगाई को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती होगी। आम लोगों को फिलहाल अपने घरेलू बजट का अधिक सावधानी से प्रबंधन करना पड़ सकता है, क्योंकि खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर अर्थव्यवस्था के लगभग हर क्षेत्र पर पड़ता है।
Written By: Geeta Sharma




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