
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार,11 जुलाई को सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया। हजरतबल में बेगम अकबर जहां अब्दुल्ला (मादर-ए-मेहरबान) की 26वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि जम्मू क्षेत्र के एक NC विधायक को पार्टी छोड़ने के लिए 20 से 30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल कराने का वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें एक बार फिर नेशनल कॉन्फ्रेंस को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता किसी कीमत पर खरीदी नहीं जा सकती।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर होगा बड़ा प्रदर्शन
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी सरकार और पार्टी ने पिछले लगभग 2 वर्षों तक टकराव की राजनीति से बचते हुए बातचीत और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल कराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को अपने वादों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि नेशनल कॉन्फ्रेंस 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेगी। इस प्रदर्शन का उद्देश्य केंद्र सरकार पर राज्य का दर्जा बहाल करने के अपने वादे को पूरा करने के लिए दबाव बनाना होगा।
केंद्र सरकार और बीजेपी पर साधा निशाना
अपने संबोधन में उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी जम्मू-कश्मीर में दलबदल के जरिए सरकार बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र की मंशा यही है कि राज्य का दर्जा तभी बहाल होगा जब बीजेपी यहां सत्ता में आएगी, तो उसे यह बात खुलकर जनता के सामने कहनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दिए गए रोडमैप की दिलाई याद
उमर अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत रोडमैप का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने उस समय तीन चरणों की प्रक्रिया बताई थी पहले परिसीमन, फिर विधानसभा चुनाव और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करना। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं और जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से नई सरकार को जनादेश दिया है। ऐसे में अब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाना कई सवाल खड़े करता है।
राजभवन की भूमिका पर भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि सभी महत्वपूर्ण फैसले राजभवन से ही लिए जाने हैं और निर्वाचित सरकार के अधिकार सीमित रहेंगे, तो फिर चुनाव कराने का उद्देश्य क्या था। उन्होंने कहा कि जनता ने एक निर्वाचित सरकार इसलिए चुनी है ताकि वह प्रशासनिक और नीतिगत फैसले ले सके। यदि सरकार के हाथ बंधे रहेंगे, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का उद्देश्य कमजोर पड़ जाएगा।
'सब्र हमारी कमजोरी नहीं, ताकत है'
अपने भाषण के अंत में उमर अब्दुल्ला ने पार्टी के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के संघर्षों को देखा है और 1984 में नेशनल कॉन्फ्रेंस के विभाजन का दौर भी देखा है। इसके बावजूद पार्टी ने हमेशा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा कि धैर्य को कभी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उनकी पार्टी अपने अधिकारों और जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने दोहराया कि उनकी सबसे बड़ी और स्पष्ट मांग जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल करना है।
Written By: Geeta Sharma















