
अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चंदा संग्रह में अनियमितताओं की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया है। ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। इस संबंध में शनिवार को दिल्ली में गठित सर्च कमेटी की पहली बैठक आयोजित हुई। जिसमें उम्मीदवारों के चयन के लिए आवश्यक योग्यता, अनुभव और अन्य पात्रता संबंधी मानदंड तय किए गए। यह नियुक्ति प्रक्रिया ऐसे समय में शुरू हुई है जब मंदिर में दान राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर जांच जारी है।
तीन सदस्यीय सर्च कमेटी करेगी चयन
सूत्रों के अनुसार, नए CEO के चयन के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया गया है। इस समिति में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी तथा श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हावड़े शामिल हैं। समिति ने अपनी पहली बैठक में चयन प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार की और पात्र उम्मीदवारों के लिए आवश्यक शर्तों को अंतिम रूप दिया।
उम्मीदवारों के लिए तय की गई योग्यता
सर्च कमेटी द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार CEO पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार का न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक (ग्रेजुएट) होना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही प्रशासन (Administration) या वित्त (Finance) के क्षेत्र में कम से कम 20 वर्षों का अनुभव होना जरूरी है। समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों को मंदिर प्रबंधन (Temple Management) का अनुभव होगा, उन्हें चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा आवेदक का हिंदू धर्म का अनुयायी होना भी आवश्यक शर्तों में शामिल किया गया है।
18 जुलाई तक किए जा सकेंगे आवेदन
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि उम्मीदवार 18 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। आवेदन ईमेल के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे, जिसके लिए ट्रस्ट एक विशेष ईमेल आईडी जारी करेगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद सर्च कमेटी पात्र उम्मीदवारों के साथ चर्चा और साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी करेगी। इसके बाद अंतिम चयन किया जाएगा।
अयोध्या में रहना होगा अनिवार्य
ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट किया गया है कि चयनित CEO को अयोध्या में स्थायी रूप से रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। प्रारंभिक नियुक्ति 3 वर्षों के लिए की जाएगी। आवश्यकता और प्रदर्शन के आधार पर आगे की अवधि पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा चयन प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए समिति ने एक सचिव नियुक्त करने का भी निर्णय लिया है। ट्रस्ट की योजना है कि अगले एक महीने के भीतर CEO की नियुक्ति पूरी कर ली जाए।
नृपेंद्र मिश्रा ने दान में गड़बड़ी को बताया कलंक
इस बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कथित दान हेराफेरी के मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दान राशि में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पूरे ट्रस्ट और मंदिर प्रशासन के लिए एक 'कलंक' है। उन्होंने कहा कि इस घटना से सभी लोग स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे हैं और ट्रस्ट इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है। मिश्रा ने भरोसा जताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
CEO चयन पर अंतिम निर्णय समिति का होगा
नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि नए CEO की नियुक्ति पूरी तरह 3 सदस्यीय सर्च कमेटी की सिफारिशों के आधार पर होगी। अंतिम निर्णय भी यही समिति करेगी ताकि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट प्रशासन चाहता है कि मंदिर के संचालन और प्रबंधन के लिए अनुभवी, ईमानदार और कुशल अधिकारी की नियुक्ति हो, जिससे भविष्य में प्रशासनिक कार्यों में और अधिक दक्षता लाई जा सके।
मंदिर निर्माण अंतिम चरण में
नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर निर्माण कार्य की प्रगति की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुराने मंदिर से संबंधित अधिकांश निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब 24 घंटे जलने वाली अखंड ज्योति की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण परियोजना अपने अंतिम चरण में है और शेष कार्य 30 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
Written By: Geeta Sharma















