
लगभग 4 वर्षों के सतत प्रयास, ऐतिहासिक शोध और सभ्यतागत चेतना के प्रति समर्पण का आज सार्थक परिणाम सामने आया है। 'शाहजहांनाबाद रीडेवलपमेंट कॉर्पोरेशन' का नाम बदलकर 'इंद्रप्रस्थ विरासत पुनर्विकास निगम (IVPN)' किया जाना केवल एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान के सम्मान और पुनर्स्थापन का ऐतिहासिक निर्णय है। इस महत्वपूर्ण पहल को सफल बनाने के लिए हम माननीय मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री श्री रेखा गुप्ता, शहरी विकास मंत्री एवं निगम के उपाध्यक्ष श्री आशीष सूद तथा डीडीए अध्यक्ष एवं दिल्ली के उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू (IFS) के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं। यह निर्णय दिल्ली की वास्तविक सभ्यतागत विरासत को नई पहचान प्रदान करता है।
दिल्ली मास्टर प्लान 2041 और विरासत का प्रश्न
जब दिल्ली मास्टर प्लान 2041 (DMP-2041) प्रकाशित हुआ, तब यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्तावित क्षेत्र के नामकरण में उसकी प्राचीन सभ्यतागत पहचान और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया। इसके स्थान पर ऐसे नामों को प्राथमिकता दी गई जिनका इस भूभाग की मूल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से सीमित संबंध रहा है। ऐतिहासिक दृष्टि से शाहजहां ने प्रशासनिक एवं राजसी कारणों से आगरा से दिल्ली का रुख किया था, किंतु इस क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत विकास का आधार उससे कहीं अधिक प्राचीन है।
वैदिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता IVPN क्षेत्र
नवनिर्मित IVPN के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र वैदिक काल से लेकर इतिहास के अनेक महत्वपूर्ण चरणों का साक्षी रहा है। यहां स्थित विविध पुरातात्त्विक एवं सांस्कृतिक स्थल सनातन दर्शन, भारतीय संस्कृति तथा उन महान विभूतियों की स्मृतियों को संजोए हुए हैं जिन्होंने आर्यावर्त के इस मूल स्वरूप को आकार दिया। यह क्षेत्र भारत की निरंतर जीवित सभ्यता की ऐतिहासिक यात्रा का महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व करता है।
द्रौपदी ड्रीम ट्रस्ट के सतत प्रयास
वर्ष 2022 में द्रौपदी ड्रीम ट्रस्ट ने DMP-2041 के संदर्भ में तथा SRDC नाम की उपयुक्तता पर प्रश्न उठाते हुए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को औपचारिक शिकायत प्रस्तुत की। इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की लंबे समय से उपेक्षित ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नीति-निर्माताओं के समक्ष लाना था। ट्रस्ट की अध्यक्षा सुश्री नीरा मिश्रा ने इस विषय पर तत्कालीन संस्कृति सचिव श्री गोविंद मोहन के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी। इसके पश्चात विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) एवं अनेक इतिहासविदों और विद्वानों के साथ आयोजित गोलमेज चर्चाओं में इस विषय पर व्यापक विमर्श हुआ तथा संबंधित प्राधिकरणों से औपचारिक संवाद स्थापित करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
नीतिगत स्तर पर संवाद और आगे की दिशा
वर्ष 2024 में सुश्री नीरा मिश्रा ने केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट कर अपने शोध एवं ऐतिहासिक साक्ष्य प्रस्तुत किए। इसके बाद वर्ष 2025 में अधिवक्ता आदित्य त्रिवेदी के साथ उन्होंने शहरी विकास मंत्री तथा SRDC (पूर्व) के उपाध्यक्ष श्री आशीष सूद से भी विस्तृत चर्चा की और प्रमाणों सहित प्रस्तुति दी। इन सतत प्रयासों का उद्देश्य केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि इंद्रप्रस्थ की प्राचीन सभ्यतागत पहचान को समुचित सम्मान दिलाना और भारत की निरंतर जीवित सांस्कृतिक विरासत को सार्वजनिक नीति में उचित स्थान प्रदान करना है। यह पहल इंद्रप्रस्थ के ऐतिहासिक गौरव के पुनर्स्मरण और उसके पुनर्स्थापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी कदम मानी जा रही है।
Written By: एम अतहर उद्दीन मुन्ने भारती















