
फिरोजाबाद जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया था। जिसमें डेढ़ साल के मासूम आरव की हत्या कर दी गई थी। इस अपराध के दोषी रिश्ते के चाचा विराज पाठक को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। घटना के महज 41 दिन के भीतर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फैसला सुनाकर न्यायिक प्रक्रिया की तेज गति का उदाहरण पेश किया। इस मामले में पुलिस ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए केवल 6 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
एकतरफा प्रेम बना मासूम की मौत की वजह
जानकारी के अनुसार, सिरसागंज तहसील के गांव बामई निवासी रति की शादी बदायूं के सियाराम नगर निवासी सुमित उर्फ प्रियंक से हुई थी। दांपत्य जीवन में विवाद के चलते रति अपने पति से अलग होना चाहती थी। इसी दौरान रिश्ते का देवर विराज पाठक, जो बदायूं के शेखुपुरा का रहने वाला है, रति पर शादी का दबाव बना रहा था। जब रति ने उसकी बात नहीं मानी, तो विराज ने उसके डेढ़ वर्षीय बेटे आरव को अपनी राह का सबसे बड़ा रोड़ा मान लिया।
टॉफी का बहाना बनाकर ले गया, आठ बार जमीन पर पटका
30 मई की दोपहर शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में विराज ने आरव को टॉफी दिलाने का लालच देकर अपने साथ ले लिया। इसके बाद उसने सुनसान स्थान पर मासूम को कई बार जमीन पर पटक दिया। गंभीर रूप से घायल बच्चे को परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया था।
पुलिस ने कुछ घंटों में आरोपी को किया गिरफ्तार
वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया था। पुलिस को सूचना मिली कि वह मैनपुरी रोड स्थित बुड्ढा भरथरा चौराहे के पास देखा गया है। पुलिस टीम ने इलाके की घेराबंदी की। इस दौरान आरोपी ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में उसके दोनों पैरों में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके कब्जे से एक देसी पिस्तौल, पांच जिंदा कारतूस और दो खाली खोखे भी बरामद किए गए।
6 दिन में चार्जशीट, 41 दिन में फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तेजी से जांच पूरी की और मात्र छह दिन के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। इसके बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट में लगातार सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने सभी वैज्ञानिक और प्रत्यक्ष साक्ष्य अदालत के सामने प्रस्तुत किए। वायरल वीडियो और अन्य सबूतों को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया।
मां की मांग पूरी, दोषी को मिली फांसी
सुनवाई के दौरान मृतक बच्चे की मां ने अदालत से आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की थी। सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने विराज पाठक को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में इस हत्या को अत्यंत जघन्य और दुर्लभ श्रेणी का अपराध माना।
समाज के लिए कड़ा संदेश
यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि समाज के लिए भी एक सख्त संदेश है कि मासूम बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराध करने वालों के प्रति कानून किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा। पुलिस की त्वरित जांच, समयबद्ध चार्जशीट और फास्ट ट्रैक कोर्ट की सुनवाई ने यह भी दिखाया कि गंभीर मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है।
Written By: Geeta Sharma















