
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार की महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से हुई मुलाकात पर आपत्ति जताई है, उन्होंने कहा कि शरद पवार देश के वरिष्ठ और सम्मानित नेताओं में शामिल हैं, लेकिन शिंदे के कार्यालय में पार्टी से जुड़ी बैठक करना उचित फैसला नहीं था। राउत के अनुसार, इससे उन नेताओं को राजनीतिक सम्मान मिलने का संदेश जाता है, जिन पर उनकी सरकार गिराने और विश्वासघात करने के आरोप लगते रहे हैं।
शरद पवार ने शिंदे से क्यों की मुलाकात?
बीते दिन यानी बुधवार 8 जुलाई को शरद पवार महाराष्ट्र विधानसभा परिसर पहुंचे थे। वह महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद के संबंध में राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की बैठक में हिस्सा लेने आए थे। इसी दौरान उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय में जाकर उनसे शिष्टाचार मुलाकात भी की। सरकारी पक्ष का कहना है कि यह मुलाकात औपचारिक थी और सीमा विवाद से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।
संजय राउत ने क्या कहा?
संजय राउत ने कहा कि शरद पवार के प्रति उनके मन में पूरा सम्मान है, लेकिन जिन लोगों ने महाविकास आघाड़ी सरकार को गिराने में भूमिका निभाई, उनके कार्यालय में जाकर बैठक करना उचित नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, ऐसा कदम वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
एकनाथ शिंदे के कार्यालय को चुनने की आवश्यकता नहीं- राउत
राउत ने यह भी कहा कि विधान भवन, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का कार्यालय या यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान जैसे कई अन्य स्थान बैठक के लिए उपलब्ध थे। ऐसे में एकनाथ शिंदे के कार्यालय को चुनने की कोई आवश्यकता नहीं थी, उन्होंने कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं की भावना भी है, उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवसेना कभी भी उन नेताओं के कार्यालय में पार्टी बैठक नहीं करेगी, जिन्हें वह "गद्दार" मानती है। उनके अनुसार, विश्वासघात को किसी भी परिस्थिति में सामान्य या स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।
महाविकास आघाड़ी की मर्यादा पर भी उठाए सवाल
राउत ने कहा कि यदि उनकी पार्टी ऐसी स्थिति में होती तो वह अजित पवार के कार्यालय में भी बैठक नहीं करती। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपने राजनीतिक नेतृत्व के साथ विश्वासघात किया, उन्हें सम्मान देने से भविष्य में ऐसे मामलों पर नैतिक रूप से कड़ा रुख अपनाना कठिन हो जाता है। उन्होंने महाविकास आघाड़ी के सभी सहयोगी दलों से भी राजनीतिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
सीमा विवाद की बैठक पर भी जताई नाराजगी
राउत ने महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर आयोजित बैठक को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसमें किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि इस विषय से जुड़े प्रमुख राजनीतिक दलों, विशेषकर शिवसेना, को बैठक में क्यों नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि यह मामला वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए सरकार को अपनी रणनीति और आगे की कार्रवाई स्पष्ट करनी चाहिए।
एनडीए में जाने की अटकलों को किया खारिज
संजय राउत ने यह भी साफ किया कि उन्हें पूरा विश्वास है कि शरद पवार एनडीए का हिस्सा नहीं बनेंगे, उन्होंने कहा कि शरद पवार की विचारधारा पर उन्हें कोई संदेह नहीं है और वह उन्हें लंबे समय से जानते हैं। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि शिंदे के कार्यालय में बैठक करने का फैसला शिवसेना के कार्यकर्ताओं को असहज करने वाला था और इससे अनावश्यक राजनीतिक संदेश गया।
शरद पवार से व्यक्तिगत स्तर पर है अच्छे संबंध- राउत
राउत ने कहा कि उनकी शरद पवार से व्यक्तिगत स्तर पर अच्छे संबंध हैं और वह उनसे खुलकर अपनी बात कह सकते हैं। लेकिन पार्टी के दृष्टिकोण से यह गंभीर विषय है। उनका कहना था कि जिन्होंने राजनीतिक विश्वास तोड़ा, उन्हें सम्मान देना उचित नहीं है और शिवसेना भविष्य में भी ऐसे नेताओं के कार्यालय में पार्टी की बैठक नहीं करेगी।
Written By Toshi Shah

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