
जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने कच्छ जिले में मस्जिदों, दरगाहों, मकानों और दुकानों के हालिया ध्वस्तीकरण की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन के नाज़िम-ए-उमूमी मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भुज कलेक्टर कार्यालय में रेज़िडेंट एडिशनल कलेक्टर पार्थ कोटडिया से मुलाकात कर मांग की कि सभी प्रशासनिक कार्रवाइयाँ संविधान, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप की जाएं।
ध्वस्तीकरण की घटनाओं पर प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से किया सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से सवाल किया कि जिन क्षेत्रों में ध्वस्तीकरण किया गया है, वे अंतरराष्ट्रीय सीमा से काफी दूर स्थित हैं। ऐसे में इन कार्रवाइयों का कानूनी आधार क्या है, इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि कोई क्षेत्र सीमा से संबंधित भी हो, तब भी किसी नागरिक, धार्मिक स्थल या वक्फ़ संपत्ति के विरुद्ध कार्रवाई केवल विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए ही की जा सकती है।
बैठक में जमीयत ने प्रशासन के समक्ष रखीं कई मांगें
बैठक के दौरान जमीयत ने कई महत्वपूर्ण मांगें प्रशासन के समक्ष रखीं। इनमें नाना वरनोरा में मकानों और दुकानों के ध्वस्तीकरण का कानूनी आधार स्पष्ट करना, सरपंच के कथित फर्जी हस्ताक्षरों की निष्पक्ष जांच, नाबालिगों सहित गिरफ्तार लोगों की रिहाई, प्रभावित परिवारों का पुनर्वास एवं उचित मुआवज़ा, धार्मिक स्थलों और वक्फ़ संपत्तियों से जुड़े मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन तथा भविष्य में किसी भी ध्वस्तीकरण से पहले उचित नोटिस और सुनवाई का अवसर सुनिश्चित करना शामिल है।
रेज़िडेंट एडिशनल कलेक्टर पार्थ कोटडिया ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि उठाए गए मुद्दों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा तथा कानून के अनुसार उनका परीक्षण किया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित परिवारों से की मुलाकात
इससे पहले प्रतिनिधिमंडल ने कच्छ जिले के प्रभावित क्षेत्रों—विशेष रूप से नाना वरनोरा, दनारा, खावड़ा और तोगा—का दौरा कर प्रभावित परिवारों, स्थानीय उलेमा और सामाजिक प्रतिनिधियों से मुलाकात की। नाना वरनोरा में ध्वस्त मकानों और दुकानों का निरीक्षण करते हुए प्रतिनिधिमंडल को स्थानीय लोगों ने बताया कि हालिया कार्रवाई में 17 मकान और 21 दुकानें गिरा दी गईं। विरोध प्रदर्शन के बाद 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 6 नाबालिग भी शामिल हैं। स्थानीय सरपंच अब्दुल लतीफ़ केवर ने कुछ नोटिसों पर फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप लगाया, जिसे जमीयत ने गंभीर बताते हुए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की।
कम समय की नोटिस के बाद ध्वस्त हुआ मस्जिद: स्थानीय प्रतिनिधि
दनारा, खावड़ा और तोगा में स्थानीय प्रतिनिधियों ने बताया कि तोगा की मस्जिद को अत्यंत कम समय की नोटिस के बाद ध्वस्त कर दिया गया। इसके अलावा आदिपुर (कांडला) की एक मस्जिद पर भी पहले ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है। प्रतिनिधिमंडल ने इन मामलों के कानूनी पहलुओं का अध्ययन करते हुए प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने की वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ विस्तृत बैठक
इस पूरे प्रकरण में आगे की रणनीति तय करने के लिए जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने भुज में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ विस्तृत बैठक भी की। संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देश पर अधिवक्ताओं का एक विशेष पैनल गठित किया गया है, जो सभी मामलों का अध्ययन कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेगा।
मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी का बयान
इस अवसर पर मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी ने कहा कि कच्छ से जमीयत उलेमा-ए-हिन्द का संबंध कई दशकों पुराना है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2001 के विनाशकारी भूकंप के दौरान जमीयत सबसे पहले राहत कार्यों में पहुंचने वाले संगठनों में शामिल थी। संगठन ने प्रभावित परिवारों के लिए सैकड़ों मकानों का निर्माण कराया और जमीयत चिल्ड्रन्स विलेज जैसे स्थायी शैक्षिक एवं कल्याणकारी संस्थानों की स्थापना की। उन्होंने कहा कि उसी मानवीय और ऐतिहासिक जिम्मेदारी के तहत जमीयत आज भी कच्छ के प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है और उनके संवैधानिक तथा कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।
Written By: एम अतहर उद्दीन मुन्ने भारती















