अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, राष्ट्रपति की शक्तियां बढ़ीं; फेडरल रिजर्व को मिली छूट

अदालत ने माना कि केंद्रीय बैंक के प्रमुख को छोड़कर राष्ट्रपति अपनी इच्छा से किसी भी एजेंसी के प्रमुख को बर्खास्त कर सकते हैं और इसके लिए किसी ठोस कारण की वजह की जरूरत भी नहीं है।

2 घंटे पहले

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अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि राष्ट्रपति अधिकांश स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के प्रमुखों को अपनी इच्छा से पद से हटा सकते हैं। अदालत ने 6-3 के बहुमत से यह निर्णय दिया, जिससे राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों का दायरा पहले की तुलना में अधिक व्यापक हो गया।

फेडरल रिजर्व के अधिकारियों को हटाने पर ट्रंप की शक्ति सीमित

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अधिकार लगभग सभी स्वतंत्र संघीय एजेंसियों पर लागू होगा, लेकिन अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व, को इस व्यवस्था से अलग रखा गया है। यानी राष्ट्रपति फेडरल रिजर्व के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्यों या उसके नेतृत्व को मनमाने ढंग से पद से नहीं हटा सकते।

संवैधानिक अधिकारों का हवाला देकर कोर्ट ने बदला पुराना नियम

यह फैसला 91 वर्ष पुराने उस न्यायिक सिद्धांत में बदलाव माना जा रहा है, जिसके तहत स्वतंत्र एजेंसियों के अधिकारियों को हटाने के लिए राष्ट्रपति को उचित और कानूनी कारण बताना आवश्यक होता था। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि ऐसी सीमाएं संविधान में कार्यपालिका को दिए गए अधिकारों के अनुरूप नहीं हैं।

कंजर्वेटिव जजों के बहुमत से बढ़ी राष्ट्रपति की शक्तियां

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति को अपने अधीन कार्य करने वाले अधिकारियों को हटाने से रोकने वाली व्यवस्थाएं संविधान में शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के विपरीत हैं। यह निर्णय छह कंजर्वेटिव न्यायाधीशों के समर्थन से पारित हुआ, जबकि तीन लिबरल न्यायाधीशों ने इसका विरोध किया।

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों को दी नई धार

यह मामला पूर्व फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) की आयुक्त रेबेका स्लॉटर की बर्खास्तगी से जुड़ा था। ट्रंप प्रशासन ने उन्हें बिना कोई कारण बताए पद से हटा दिया था, जबकि उस समय लागू कानून के अनुसार ऐसी कार्रवाई के लिए ठोस कारण आवश्यक था। सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले के बाद ऐसी कई स्वतंत्र एजेंसियों के प्रमुखों को हटाने का राष्ट्रपति का अधिकार मजबूत हो गया है। इसका प्रभाव नेशनल लेबर रिलेशंस बोर्ड, मेरिट सिस्टम्स प्रोटेक्शन बोर्ड और कंज्यूमर प्रोडक्ट सेफ्टी कमीशन जैसी संस्थाओं पर भी पड़ सकता है।

मुकदमे के अंतिम फैसले तक लिसा कुक रहेंगी अपने पद पर

हालांकि फेडरल रिजर्व के बोर्ड की सदस्य लिसा कुक के मामले में अदालत ने अलग रुख अपनाया। 5-4 के बहुमत से सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा उन्हें तत्काल पद से हटाने के प्रयास पर रोक बरकरार रखी। अदालत ने कहा कि लिसा कुक अपने पद पर तब तक बनी रहेंगी, जब तक उनकी बर्खास्तगी को चुनौती देने वाले मुकदमे का अंतिम फैसला नहीं हो जाता।

असहमति में उठे राष्ट्रपति की बढ़ती शक्तियों पर सवाल

ट्रंप प्रशासन ने लिसा कुक पर मॉर्गेज फ्रॉड से जुड़े आरोप लगाए थे, लेकिन कुक ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। अदालत ने इस चरण में उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई को उचित नहीं माना। फैसले पर असहमति जताते हुए न्यायाधीश सोनिया सोतोमेयर ने कहा कि इससे राष्ट्रपति के हाथों में अत्यधिक शक्ति केंद्रित हो सकती है, जिससे स्वतंत्र संस्थाओं की निष्पक्षता और स्वायत्तता प्रभावित होने का खतरा है। उनके अनुसार यह निर्णय प्रशासनिक संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव बढ़ा सकता है।

राष्ट्रपति की शक्तियां बढ़ने पर ट्रंप ने जताई खुशी

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अपनी बड़ी कानूनी जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राष्ट्रपति पद की संवैधानिक शक्तियों को स्पष्ट करने वाला एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व फैसला है तथा इसे राष्ट्रपति के अधिकारों से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में गिना जाएगा।

 

Written By Toshi Shah 

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