
भारत की रसोई में इस्तेमाल होने वाली LPG गैस की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए देश अब बड़े पैमाने पर अमेरिका की ओर रुख कर रहा है। जून 2026 में भारत का अमेरिका से एलपीजी आयात 1 मिलियन मीट्रिक टन का आंकड़ा पार कर सकता है, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड होगा। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व से गैस आपूर्ति विभिन्न भू-राजनीतिक तनावों और लॉजिस्टिक बाधाओं के कारण प्रभावित हुई है।
भारत को खरीदनी पड़ी महंगी अमेरिकी एलपीजी
सूत्रों के अनुसार, ईरान को लेकर अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई अनिश्चितताओं ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को चुनौती दी। इससे पहले भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व के देशों से आयात करता था, जो करीब 20 लाख टन प्रतिमाह था। लेकिन आपूर्ति बाधित होने के बाद भारत को महंगी अमेरिकी एलपीजी खरीदनी पड़ी।
अप्रैल में एलपीजी आयात घटकर 6.96 लाख टन रहा
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में एलपीजी आयात घटकर 6.96 लाख टन रह गया था। हालांकि मई में स्थिति में सुधार हुआ और आयात बढ़कर 11.5 लाख टन तक पहुंच गया। भारत पहले से ही अमेरिका से एलपीजी खरीद बढ़ाने की योजना बना रहा था ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन बेहतर किया जा सके।
देश में LPG खपत में 15 से 20 प्रतिशत तक की आ सकती है कमी
मिली जानकारी के अनुसार जलमार्ग बाधित होने के बाद भारतीय रिफाइनरों ने स्पॉट मार्केट से ऊंचे प्रीमियम पर बड़ी मात्रा में एलपीजी खरीदी। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना था। सरकार ने भी रिफाइनरों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने, घरेलू बिक्री को प्राथमिकता देने और पाइप्ड गैस नेटवर्क के विस्तार में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। इन प्रयासों के चलते देश में एलपीजी की खपत में 15 से 20 प्रतिशत तक कमी आने के संकेत मिले हैं।
भारत को अमेरिका से 11 से 12 लाख टन LPG मिलने की उम्मीद
जून में भारत को अमेरिका से 11 से 12 लाख टन एलपीजी मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से 3 से 4 लाख टन और कुवैत से करीब 45 हजार टन एलपीजी की आपूर्ति होने का अनुमान है। Kpler के आंकड़ों के अनुसार, मई में भारत ने अमेरिका से 6.48 लाख टन और यूएई से 1.34 लाख टन एलपीजी आयात की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आंशिक रूप से खुलने और मध्य पूर्व से आपूर्ति सुधरने पर आने वाले महीनों में एलपीजी की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, जिससे भारत को राहत मिलेगी।
Written By: Geeta Sharma















