
प्रकृति की ताकत का अंदाजा उत्तर वेल्स के एक पुराने गांव की कहानी से लगाया जा सकता है। कभी लोगों की चहल-पहल से भरा यह गांव लगभग एक सदी तक दुनिया की नजरों से दूर रहा। समय के साथ यहां के मकान खंडहर में बदल गए और जंगल ने पूरे इलाके को अपने आगोश में ले लिया। आज हालात ऐसे हैं कि कई इमारतों के बीच से विशाल पेड़ उग आए हैं और पुराने घर हरियाली में लगभग गायब हो चुके हैं।
1927 में खाली हो गई पूरी बस्ती
यह परित्यक्त बस्ती वेल्स के ग्विनेड क्षेत्र की नैंटल वैली में स्थित थी। 19वीं शताब्दी में यहां स्लेट खनन उद्योग तेजी से विकसित हुआ था। आसपास मौजूद डोरोथिया स्लेट खदान में काम करने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए इस गांव का निर्माण किया गया था। उस दौर में यहां बाजार, स्कूल और सैकड़ों घर मौजूद थे तथा हजारों लोग निवास करते थे। हालांकि, समय के साथ खदान का विस्तार लगातार बढ़ता गया। खुदाई गांव की सीमा तक पहुंच गई और कई स्थानों पर जमीन की स्थिरता को लेकर खतरा पैदा हो गया। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने पूरे गांव को दूसरी जगह बसाने का निर्णय लिया। इसके बाद वर्ष 1927 में निवासियों को नए इलाके में स्थानांतरित कर दिया गया और पुरानी बस्ती हमेशा के लिए खाली हो गई।
धीरे-धीरे इस क्षेत्र पर प्रकृति ने कर लिया कब्जा
गांव के उजड़ने के बाद प्रकृति ने धीरे-धीरे इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। खाली पड़े मकानों में पेड़-पौधे उगने लगे, दीवारों में जड़ें समा गईं और छतें ढहती चली गईं। वर्षों तक किसी की नजर इस जगह पर नहीं पड़ी, जिससे यह क्षेत्र घने जंगल का हिस्सा बन गया। हाल के दिनों में कुछ अर्बन एक्सप्लोरर्स ने इस भूले-बिसरे गांव की तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में दिखाई देता है कि कई मकानों के अंदर से बड़े-बड़े पेड़ निकल रहे हैं। कभी जिन कमरों में लोग रहते थे, वे अब जंगल और वन्यजीवों का आश्रय बन चुके हैं।
स्लेट उद्योग का विस्तार था सबसे बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गांव के लुप्त होने की सबसे बड़ी वजह स्लेट उद्योग का विस्तार था। उस समय वेल्स दुनिया के प्रमुख स्लेट उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता था और डोरोथिया खदान भी महत्वपूर्ण खनन स्थलों में शामिल थी। उद्योग की बढ़ती जरूरतों ने आखिरकार पूरी बस्ती को स्थानांतरित होने पर मजबूर कर दिया। आज नया तालिसर्न गांव आबाद है और वहां हजारों लोग रहते हैं, लेकिन पुरानी बस्ती केवल खंडहरों और प्रकृति की अद्भुत वापसी की कहानी बनकर रह गई है। यह स्थान इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि इंसान किसी जगह को छोड़ दे, तो प्रकृति उसे वापस अपने अधिकार में लेने में देर नहीं लगाती।
Written By Toshi Shah















