
दिल्ली में ई-रिक्शा चलाने वाले ड्राइवरों और वाहन मालिकों के लिए जल्द ही एक अहम खुशखबरी सामने आ सकती है। दिल्ली सरकार अपनी नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2.0 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। प्रस्तावित नीति के तहत पुराने और अनुपयोगी हो चुके ई-रिक्शा को सड़कों से हटाकर आधुनिक और सुरक्षित इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। इस पहल का उद्देश्य राजधानी में प्रदूषण कम करना, सड़क सुरक्षा बढ़ाना और पुराने वाहनों के मालिकों को नए वाहन खरीदने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
पुराने ई-रिक्शा स्क्रैप करने पर मिलेगा आर्थिक लाभ
पॉलिसी के मसौदे के अनुसार जनवरी 2015 से दिसंबर 2022 के बीच पंजीकृत पैसेंजर ई-रिक्शा मालिकों को विशेष लाभ दिया जा सकता है। यदि वाहन मालिक अपने पुराने ई-रिक्शा को सरकार से अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर जमा कराते हैं, तो उन्हें "सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट" जारी किया जाएगा। इस प्रमाणपत्र के आधार पर दिल्ली सरकार लगभग ₹5,000 तक का स्क्रैपिंग इंसेंटिव देने पर विचार कर रही है। हालांकि इस प्रस्ताव को अभी अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है, लेकिन इसे नई EV पॉलिसी में शामिल किए जाने की संभावना काफी मजबूत बताई जा रही है।
ग्रामीण सेवा वाहनों के लिए भी विशेष योजना
नई नीति का दायरा केवल ई-रिक्शा तक सीमित नहीं रहेगा। दिल्ली में संचालित CNG आधारित ग्रामीण सेवा वाहनों को भी इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने के लिए प्रोत्साहन देने की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, यदि कोई ग्रामीण सेवा वाहन मालिक अपना पुराना CNG वाहन स्क्रैप कराता है और छह महीने के भीतर लिथियम-आयन बैटरी या अन्य उन्नत तकनीक से लैस नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है, तो उसे ₹15,000 तक का स्क्रैपिंग इंसेंटिव मिल सकता है।
पर्यावरण और परिवहन दोनों को होगा फायदा
सरकार का मानना है कि इस कदम से राजधानी में पुराने और कम सुरक्षित वाहनों की संख्या घटेगी। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलने से प्रदूषण में कमी आएगी और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी अधिक आधुनिक एवं टिकाऊ बन सकेगी। यदि प्रस्तावित EV पॉलिसी 2.0 को मंजूरी मिलती है, तो हजारों ई-रिक्शा और ग्रामीण सेवा वाहन मालिकों को सीधे आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
Written By Toshi Shah















