तेल कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट, पेट्रोल-डीजल महंगे होने के बावजूद निवेशकों में बेचैनी

देश में पेट्रोल-डीजल ₹3 और CNG ₹2 महंगा होने के बावजूद तेल कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। जानें क्यों $106 के पार पहुंचे कच्चे तेल ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता और पेंट कंपनियों के स्टॉक्स पर भी क्यों पड़ा बुरा असर।

8 घंटे पहले

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शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों पर भारी दबाव देखने को मिला। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बावजूद निवेशकों ने ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में बिकवाली की। इसका असर सिर्फ तेल कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पेंट सेक्टर के स्टॉक्स भी कमजोरी के साथ कारोबार करते नजर आए।

तेल कंपनियों के शेयरों में गिरावट

शेयर बाजार खुलते ही हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के शेयर लाल निशान में पहुंच गए।

* HPCL का शेयर करीब 2.5% तक गिरकर ₹368 के आसपास पहुंच गया।
* BPCL में लगभग 2% से ज्यादा की कमजोरी दर्ज की गई।
* IOC के शेयर में भी 1% से अधिक की गिरावट देखने को मिली।
* रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों पर भी दबाव दिखाई दिया।

बीएसई पर कारोबार के दौरान BPCL करीब 2.7%, HPCL लगभग 2.4% और IOC करीब 1.8% तक टूट गया।

आखिर क्यों गिर रहे हैं ऑयल स्टॉक्स?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की चिंता का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत $106 प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। हालांकि कंपनियों ने ईंधन के दाम बढ़ाए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि यह बढ़ोतरी उनके बढ़ते खर्च की पूरी भरपाई नहीं कर पाएगी। कच्चे तेल की लागत तेजी से बढ़ रही है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार यदि क्रूड ऑयल लंबे समय तक $100 प्रति बैरल के आसपास बना रहता है, तो सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बाजार को ज्यादा कीमत बढ़ने की थी उम्मीद

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को उम्मीद थी कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इससे बड़ी बढ़ोतरी होगी। चूंकि वैश्विक बाजार में क्रूड लगातार महंगा बना हुआ है, इसलिए कंपनियों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए अधिक मूल्य वृद्धि की संभावना जताई जा रही थी। कम बढ़ोतरी के कारण निवेशकों को लगा कि कंपनियों की कमाई पर दबाव जारी रहेगा, जिसके चलते शेयरों में बिकवाली बढ़ गई।

CNG कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी

सीएनजी की कीमतों में ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी के बाद सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के शेयरों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

* इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के शेयर करीब 1.8% टूटे।
* महानगर गैस लिमिटेड (MGL) में 1% से ज्यादा गिरावट दर्ज हुई।
* वहीं गुजरात गैस के शेयर हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे।

पेंट कंपनियों पर भी असर

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर पेंट कंपनियों पर भी पड़ा। पेंट उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कई केमिकल और कच्चे माल क्रूड ऑयल से जुड़े होते हैं।

इसी वजह से:

* इंडिगो पेंट्स के शेयर में लगभग 1.3% की गिरावट आई।
* एशियन पेंट्स और बर्जर पेंट्स के शेयर भी कमजोरी में कारोबार करते दिखे।

चार साल बाद बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में यह बढ़ोतरी अप्रैल 2022 के बाद पहली बार हुई है। इससे पहले लोकसभा चुनाव 2024 से पहले सरकार ने आम लोगों को राहत देते हुए ईंधन पर ₹2 प्रति लीटर की कटौती की थी। इस बार दाम बढ़ने के पीछे मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी चिंताएं और वैश्विक सप्लाई बाधित होने का खतरा प्रमुख वजह मानी जा रही है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन महंगा होने का असर आने वाले समय में परिवहन लागत पर पड़ेगा। इससे रोजमर्रा के सामान और सेवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियां कीमतों को संतुलित रखने की कोशिश कर रही हैं ताकि कंपनियों को राहत मिले और आम जनता पर महंगाई का ज्यादा बोझ न पड़े।

Written By Toshi Shah

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