
हैदराबाद में चर्चित POCSO मामले में केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी भागीरथ पर आरोप लगाने वाली नाबालिग लड़की की मां ने 14 मई को एक भावुक प्रेस रिलीज जारी की। पांच पन्नों के इस बयान में परिवार ने मानसिक दबाव, धमकियों, भावनात्मक शोषण और जांच प्रक्रिया के दौरान परेशान किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि उनकी केवल एक मांग है, निष्पक्ष जांच और उनकी बेटी को न्याय।
नाबालिग लड़की की मां ने सुनाई दर्द
मां ने अपने बयान में कहा कि उनका परिवार एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार है और उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि एक दिन उन्हें अपनी बेटी की सुरक्षा और इंसाफ के लिए सार्वजनिक रूप से आवाज उठानी पड़ेगी, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रेस रिलीज किसी प्रचार या बदले की भावना से नहीं, बल्कि इसलिए जारी की गई क्योंकि अब चुप रहना उनके लिए और ज्यादा पीड़ादायक हो गया था।
क्या है पूरा मामला
परिवार के अनुसार, नाबालिग लड़की की मुलाकात वर्ष 2025 में बंदी भागीरथ से हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत थी, लेकिन धीरे-धीरे यह संबंध कथित तौर पर भावनात्मक निर्भरता में बदल गया। मां का आरोप है कि उनकी बेटी पर कई बार शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला गया और विरोध करने पर उसे मानसिक रूप से प्रभावित किया गया। बयान में 31 दिसंबर 2025 और 1 जनवरी 2026 की रात का भी उल्लेख किया गया है। परिवार का आरोप है कि मोइनाबाद इलाके में लड़की पर शराब पीने का दबाव बनाया गया और बाद में उसकी कमजोर स्थिति का फायदा उठाकर अनुचित शारीरिक व्यवहार किया गया। परिवार ने कहा कि मामले की जांच जारी है और उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।
इलेक्ट्रॉनिक चैट, मैसेज और डिजिटल बातचीत के रिकॉर्ड मौजूद- नाबालिग की मां
मां ने दावा किया कि परिवार के पास इलेक्ट्रॉनिक चैट, मैसेज और डिजिटल बातचीत के रिकॉर्ड मौजूद हैं। उनके अनुसार, इन संदेशों में आरोपी की ओर से माफी मांगने, भावनात्मक टूटन जाहिर करने और संबंध सुधारने की कोशिशों जैसी बातें सामने आती हैं। परिवार ने जांच एजेंसियों से सभी डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने और उनकी फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि जनवरी 2026 में रिश्ता खत्म होने के बाद लड़की की मानसिक स्थिति काफी खराब हो गई थी। इसके बाद कथित तौर पर परिवार पर कानूनी कार्रवाई आगे न बढ़ाने के लिए अप्रत्यक्ष दबाव और समझौते के प्रयास किए गए। मां ने आरोप लगाया कि 23 अप्रैल 2026 को वे सुरक्षा और भरोसे की उम्मीद लेकर केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार से मिले थे, लेकिन वहां से वे खुद को डरा और असहज महसूस करते हुए लौटे।
पुलिस स्टेशन की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
प्रेस रिलीज में पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। परिवार का आरोप है कि नाबालिग से जुड़े गंभीर आरोप बताने के बावजूद उन्हें कई घंटों तक इंतजार कराया गया और काफी देर बाद शिकायत दर्ज की गई। उनका कहना है कि पूरे समय परिवार मानसिक तनाव और भय के माहौल में रहा। बयान के मुताबिक, बाद में दर्ज विस्तृत शिकायत में POCSO एक्ट की गंभीर गैर-जमानती धाराएं भी जोड़ी गईं। परिवार ने इसे जांच की सही दिशा में उठाया गया कदम बताया, लेकिन साथ ही चिंता जताई कि आरोपी अब भी बाहर है, जिससे वे लगातार डर और सामाजिक दबाव के बीच जीवन जी रहे हैं।
नाबालिग की मां ने की अपील
नाबालिग की मां ने मीडिया और आम लोगों से अपील की है कि बच्ची की पहचान उजागर न की जाए और मामले से जुड़ी निजी सामग्री सोशल मीडिया पर साझा करने से बचा जाए। उनका कहना है कि इससे पीड़ित बच्ची का मानसिक आघात और बढ़ सकता है। परिवार ने अंत में कहा कि उन्हें अब भी न्यायपालिका, संविधान और कानून के शासन पर पूरा विश्वास है।
Written By Toshi Shah


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