
चीन के शंघाई में सामने आए एक चर्चित मामले ने कॉर्पोरेट जगत में “हितों के टकराव”और कर्मचारियों के निजी जीवन की सीमाओं पर नई बहस छेड़ दी। यहां एक महिला कर्मचारी को सिर्फ इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया, क्योंकि उसके पति कथित तौर पर प्रतिद्वंद्वी कंपनी से जुड़े हुए थे। हालांकि अदालत ने कंपनी के इस फैसले को गलत ठहराते हुए महिला के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया।
17 साल तक सेवा देने के बाद भी कंपनी ने निकला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लियू (बदला हुआ नाम) वर्ष 2006 से एक प्रॉपर्टी मैनेजमेंट कंपनी में कार्यरत थीं। करीब 17 साल तक सेवा देने के बाद 2023 में कंपनी ने उन्हें अचानक बर्खास्त कर दिया। कंपनी का आरोप था कि लियू के पति प्रतिस्पर्धी कंपनी से जुड़े हैं, जिससे कारोबारी हित प्रभावित हो सकते हैं। कंपनी ने अदालत में दलील दी कि लियू ऑपरेशन मैनेजर के पद पर थीं और उनके पास संवेदनशील कारोबारी जानकारी तक पहुंच थी। कंपनी को आशंका थी कि वह यह जानकारी अपने पति तक पहुंचा सकती हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि लियू के पति अपनी मां के नाम पर चल रही एक प्रतिद्वंद्वी फर्म से जुड़े हुए हैं और कई उद्योग कार्यक्रमों में खुद को उस कंपनी का महाप्रबंधक बताते रहे हैं।
लियू ने सारे आरोप से किया इनकार
दूसरी ओर, लियू ने सभी आरोपों से इनकार किया। उनका कहना था कि उन्होंने कभी किसी गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग नहीं किया, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पति का संबंधित कंपनी में कोई स्वामित्व अधिकार नहीं है और वे केवल कामकाजी सुविधा के लिए खुद को वहां का कर्मचारी बताते थे।
कोर्ट ने दोनों के दलील सुने
मामला अदालत पहुंचने पर कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। जांच के दौरान कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि लियू या उनके पति की वजह से कंपनी को वास्तविक नुकसान हुआ था। अदालत ने कहा कि केवल पति-पत्नी का एक ही उद्योग या प्रतिस्पर्धी कंपनियों में काम करना अपने आप में नियमों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने चीन के श्रम कानून का हवाला देते हुए कहा कि “नॉन-कॉम्पिटिशन” यानी प्रतिस्पर्धा-निरोधक शर्तें केवल वरिष्ठ अधिकारियों या विशेष पदों पर लागू होती हैं और इसके लिए स्पष्ट लिखित समझौता होना जरूरी है। चूंकि लियू के साथ ऐसा कोई समझौता मौजूद नहीं था, इसलिए कंपनी की कार्रवाई को अनुचित माना गया।
कोर्ट ने सुनाई महिला के हक में फैसला
अदालत ने कंपनी को आदेश दिया कि वह लियू को वेतन, बोनस और अवकाश से जुड़े बकाए सहित कुल 6,90,000 युआन का भुगतान करे, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 95 लाख रुपये के बराबर है। यह फैसला कर्मचारियों के निजी संबंधों और पेशेवर अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
Written By Toshi Shah


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