
शहद को हम अक्सर सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाली चीज़ समझते हैं, लेकिन यह एक शक्तिशाली प्राकृतिक उपचार भी है। आजकल छोटे-मोटे घावों के इलाज में शहद का इस्तेमाल फिर से लोकप्रिय हो रहा है। बागवानी करते समय या घर के काम में हल्की चोट लगने पर लोग अब केवल एंटीसेप्टिक क्रीम पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि रसोई में मौजूद शहद को भी प्राथमिक उपचार के रूप में अपनाने लगे हैं।
प्राचीन मिस्र और रोमन सभ्यताओं का है ये चलन
यह कोई नया चलन नहीं है। प्राचीन मिस्र और रोमन सभ्यताओं में भी घावों को भरने के लिए शहद का उपयोग किया जाता था। इसकी उपचार क्षमता इसके विशेष रासायनिक गुणों में छिपी होती है। जब शहद को ताजे घाव पर लगाया जाता है, तो यह एक सुरक्षात्मक परत बना देता है, जो धूल और हानिकारक जीवाणुओं से बचाव करती है।
उत्पन्न करता है हाइड्रोजन पेरॉक्साइड
शहद की खासियत यह है कि यह त्वचा की नमी के संपर्क में आते ही हाइड्रोजन पेरॉक्साइड उत्पन्न करता है, जो बैक्टीरिया को नष्ट करने में मदद करता है। इसका प्रभाव बाजार में मिलने वाले एंटीसेप्टिक उत्पादों जैसा हो सकता है, लेकिन इसमें जलन या दर्द कम होता है। इसके अलावा, शहद का हल्का अम्लीय स्वभाव घाव के pH स्तर को कम करता है, जिससे बैक्टीरिया के लिए जीवित रहना कठिन हो जाता है।
घाव को नम बनाए में मदद करता है शहद
शहद घाव को नम बनाए रखने में भी मदद करता है। सूखे घावों में अक्सर खुजली और पपड़ी बनती है, जिससे नई त्वचा को नुकसान हो सकता है। इसके विपरीत, शहद नमी बनाए रखकर कोशिकाओं के तेजी से पुनर्निर्माण में मदद करता है, जिससे घाव जल्दी भरता है। साथ ही, यह नई कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा देता है और सूजन को कम करने में भी सहायक होता है। जब घाव लाल, गर्म और दर्दनाक हो जाता है, तो यह सूजन का संकेत होता है, जिसे शहद शांत करने में मदद करता है।
ऐसे करें घाव पर प्रयोग
घरेलू उपचार के रूप में शहद का इस्तेमाल करना बेहद आसान है। सबसे पहले घाव को साफ पानी से धोकर गंदगी हटा लें। इसके बाद उस पर शहद की पतली परत लगाएं। जरूरत पड़ने पर गॉज या पट्टी से ढक सकते हैं, ताकि शहद अपनी जगह पर बना रहे। बेहतर परिणाम के लिए कच्चा या मेडिकल ग्रेड शहद इस्तेमाल करना अधिक लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इसमें एंजाइम और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होती हैं।
Written By Toshi Shah

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