
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब आम आदमी की जेब पर पड़ता दिखाई दे रहा है। सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें एक बार फिर $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं। ब्रेंट क्रूड में जहां 7% की भारी बढ़त देखी गई, वहीं अमेरिकी क्रूड ने भी 8% की उछाल के साथ $104 का आंकड़ा छू लिया। तेल की कीमतों में यह अचानक आई तेजी अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकियों का नतीजा है।
कीमतों में उछाल की वजह
कच्चे तेल में आई इस 'आग' की मुख्य वजह पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता का बेनतीजा रहना है। वार्ता विफल होने के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। यह नाकेबंदी आज भारतीय समयानुसार शाम के वक्त से प्रभावी हो जाएगी। चूंकि दुनिया का लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल परिवहन इसी रास्ते से होता है, इसलिए इस फैसले ने वैश्विक सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है और निवेशक कीमतों में भारी बढ़त की आशंका जता रहे हैं।
प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम
भले ही कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हों, लेकिन भारतीय शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। आज प्रमुख महानगरों में कीमतें इस प्रकार हैं:
दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77, डीजल ₹87.67
मुंबई: पेट्रोल ₹103.54, डीजल ₹90.03
कोलकाता: पेट्रोल ₹105.45, डीजल ₹92.02
चेन्नई: पेट्रोल ₹100.80, डीजल ₹92.39
लखनऊ: पेट्रोल ₹94.65, डीजल ₹87.76
पोर्ट ब्लेयर: पेट्रोल ₹82.46, डीजल ₹78.05 (देश में सबसे सस्ता)
एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती
महंगाई को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक दांव खेला है। सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को ₹13 से घटाकर मात्र ₹3 कर दिया है, वहीं डीजल पर लगने वाली ₹10 की पूरी ड्यूटी खत्म कर दी गई है। हालांकि, इस कटौती का फायदा ग्राहकों को सीधे तौर पर सस्ता तेल देकर नहीं पहुँचाया गया है। इसके बजाय, यह पैसा तेल कंपनियों (IOCL, BPCL) को दिया गया है ताकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद वे देश में दाम न बढ़ाएं और उनका घाटा कम हो सके।
क्या और बढ़ेंगे दाम?
फिलहाल आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के बावजूद घरेलू पंपों पर कीमतें नहीं बढ़ी हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं हुआ और होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहा, तो तेल कंपनियों के लिए इन कीमतों को लंबे समय तक स्थिर रखना नामुमकिन हो जाएगा। आने वाले कुछ दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत में ईंधन की कीमतों के लिए बहुत निर्णायक साबित होने वाले हैं।
Written by: Anushka sagar

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