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भारतीय सेना ने देशभर में 246 स्थानों, सड़कों, इमारतों और सैन्य प्रतिष्ठानों के नाम बदलकर वीर सैनिकों और युद्ध नायकों को सम्मान देने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब ये स्थान औपनिवेशिक या विदेशी प्रतीकों के बजाय भारत के वीरों की याद दिलाएंगे। इस पहल से सैनिकों की बहादुरी और देशभक्ति को पहचान मिलेगी। साथ ही यह बदलाव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा और राष्ट्रीय गौरव की भावना को मजबूत करेगा।
भारतीय सेना ने बदला 246 स्थानों के नाम
भारतीय सेना ने अपने प्रतिष्ठानों, सड़कों, इमारतों और अन्य सुविधाओं के 246 नाम बदलकर देश के वीर सैनिकों और युद्ध नायकों को सम्मान देने का बड़ा कदम उठाया है। इसका उद्देश्य औपनिवेशिक और विदेशी नामों को हटाकर भारतीय वीरता और सेवा की भावना को बढ़ावा देना है। इस बदलाव में सड़कों, कॉलोनियों, इमारतों, पार्कों और खेल मैदानों के नाम शामिल हैं।
दिल्ली और कोलकाता में बदलाव
दिल्ली कैंटोनमेंट की मशहूर माल रोड अब अरुण खेत्रपाल मार्ग के नाम से जानी जाएगी। अधिकारियों के आवास वाले किर्बी प्लेस का नाम अब केनुगुरुसे विहार रखा गया है। कोलकाता का ऐतिहासिक फोर्ट विलियम अब विजय दुर्ग के नाम से जाना जाएगा। यह बदलाव ब्रिटिश विरासत को हटाकर भारतीय विजय और गौरव को उजागर करता है।
मथुरा, अंबाला और जयपुर के नाम बदले
मथुरा कैंट में न्यू हॉर्न लाइन का नाम बदलकर अब्दुल हमीद लाइन्स किया गया है। अंबाला के पैटरसन रोड क्वार्टर्स अब धन सिंह थापा एन्क्लेव होंगे। जयपुर की क्वींस लाइन रोड अब सुंदर सिंह मार्ग के नाम से जानी जाएगी। यह नाम बदलने की प्रक्रिया से स्थानीय वीर सैनिकों की वीरता को सम्मान मिलता है।
देहरादून, बरेली और महू में भी बदलाव
देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी के कोलिंस ब्लॉक और किंग्सवे ब्लॉक के नाम अब क्रमशः नुब्रा ब्लॉक और कारगिल ब्लॉक रखे गए हैं।
बरेली में न्यू बर्डवुड लाइन अब थिमैया कॉलोनी और महू के मालकॉम लाइन्स का नाम अब पीरू सिंह लाइन्स होगा। यह बदलाव देश के वीर सैनिकों की प्रेरक कहानियों को भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाएगा।
पूर्वोत्तर और अन्य मिलिट्री स्टेशनों में सम्मान
रंगापहर मिलिट्री स्टेशन का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स अब लैशराम ज्योतिन सिंह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स होगा। जखामा मिलिट्री स्टेशन की स्पीयर लेक मार्ग का नाम बदलकर हंगपन दादा मार्ग रखा गया है। ये नाम वीर सैनिकों की शहादत और देशभक्ति की याद दिलाएंगे।
राष्ट्रीय गौरव और प्रेरणा
इस पहल से न केवल सैनिक प्रतिष्ठानों में औपनिवेशिक नामों का अंत हुआ है, बल्कि यह देशवासियों में अपने वीरों के प्रति गर्व और सम्मान की भावना भी जगाएगा। भारतीय सेना का यह कदम आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा और उन्हें देश की सेवा और साहस के महत्व की याद दिलाएगा।
- YUKTI RAI

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