
हिंदू धर्म में भगवान शिव को परम ईश्वर के रूप में पूजा जाता है, माना जाता है कि भगवान शिव का निवास स्थल श्मशान घाट में हैं, राख धारण किए वे दुखी आत्माओं की प्रार्थना स्वीकार करते हैं और बिना किसी शर्त के आशीर्वाद प्रदान करते हैं, लेकिन भारत में ऐसे भी शिव मंदिर हैं, जहां भक्तों को शिवलिंग को न छूने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। आइए जानते हैं कौन से शिव मंदिर में उनको छूना मना हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर
वाराणसी के काशी विश्वनाथ दुनिया के सबसे पवित्र शिव मंदिरों में शामिल है, जिसे मृत्यु के पश्चात मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। यहां के शिवलिंग की अत्यधिक पूजा-अर्चना की जाती है। भक्तों को शिवलिंग को सीधे तौर पर छूना मना है। ऐसा करने के पीछे यह माना जाता है कि गर्भगृह एक शक्तिशाली आध्यात्मिक केंद्र है। काशी में शिवजी को परम सत्य के रूप में पूजा जाता है, जो शारीरिक निकटता से परे है।
केदारनाथ मंदिर
उत्तराखंड के ऊंचे-ऊंचे हिमालयों के बीच में स्थित केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है, जो शिव के सबसे ऊर्जावान तीर्थ स्थलों में से एक है। बता दें कि केदारनाथ के शिवलिंग की काफी मान्यता है, क्योंकि यह प्राचीन, स्वयंभू और अत्यंत आध्यात्मिक है। यहां शिव लिंग को छूने की मनाही है। केवल पंडित और पुरोहित ही इसे छू सकते हैं। इस प्रतिबंध के पीछे का कारण शिवलिंग मात्र प्रतीक नहीं बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक शक्ति है, जिसकी सालों से निरंतर पूजा होते आ रही है।
महाकालेश्वर मंदिर
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर ज्योतिर्लिंगों में अद्वितीय है, क्योंकि इसे स्वयंभू माना जाता है,जो दक्षिण दिशा की ओर उन्मुख है, जो समय और विनाश से संबंध रखता है। महाकालेश्वर मंदिर में भी शिव लिंग को छुना मना है।
सोमनाथ मंदिर
ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला ज्योतिर्लिंग गुजरात के सोमनाथ ज्योतिर्लिंग है। जो ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। बता दें कि भक्तों को सोमनाथ शिवलिंग छूने की अनुमति नहीं है। पूजा दर्शन और पुजारी द्वारा निर्देशित अनुष्ठानों के जरिए की जाती है।
वैद्यनाथ धाम
देवघर के वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग भी आध्यात्म के नजरिए से काफी खास है। मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ तीर्थस्थल के रूप में इसकी ख्याति के बावजूद शिवलिंग के साथ शारीरिक संपर्क काफी हद तक सीमित किया गया है। भक्त स्पर्श करने के बावजूद भेंट और प्रार्थना के माध्यम से इसमें हिस्सा लेते हैं।
रामनाथस्वामी मंदिर
शैव परंपराओं में रामेश्वरम का खास स्थान है और यह रामायण से गहराई से जुड़ा है। यह मंदिर अपने पवित्र जल अनुष्ठानों के लिए काफी फेमस है। मंदिर के अन्य हिस्सों में भक्तों में व्यापक धार्मिक गतिविधियों में भागीदारी होने के बावजूद शिवलिंग को सीधे तौर पर छूना मना है।
written by- Toshi Shah












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