
मणिपुर में भाजपा ने युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना है। 62 वर्षीय खेमचंद सिंह मेतई समुदाय से आते हैं और सिंगजामेई विधानसभा सीट से विधायक हैं। पेशे से इंजीनियर रहे खेमचंद सिंह पिछली बीरेन सरकार में नगर प्रशासन और आवास विभाग के मंत्री रह चुके हैं। उनकी राजनीतिक पकड़ इस बात से भी स्पष्ट है कि 2022 में वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। खेमचंद बीजेपी और संघ के करीबी माने जाते हैं।
#WATCH दिल्ली: मणिपुर लेजिस्लेटिव पार्टी की बैठक में भाजपा नेता युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया। pic.twitter.com/wcLzE8yOVf
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 3, 2026
नई सरकार बनाने की प्रक्रिया तेज
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को हटाने की प्रक्रिया चल रही है। इसी कड़ी में बीजेपी ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को विधायक दल चुनाव का आब्जर्वर नियुक्त किया था। इस चुनाव के लिए दिल्ली में विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें युमनाम खेमचंद सिंह को नेता चुना गया।
4 फरवरी को शपथ ग्रहण की संभावना
बीजेपी मुख्यालय में हुई बैठक में खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया। इस अवसर पर तरुण चुग और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें बधाई दी। सूत्रों के अनुसार, नई सरकार का शपथ ग्रहण 4 फरवरी को कराया जा सकता है।
राष्ट्रपति से मिलने जा सकते हैं विधायक
विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद संभावना जताई जा रही है कि मणिपुर के सभी विधायक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने राष्ट्रपति भवन जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री पद की रेस में रहे अन्य दावेदार
मुख्यमंत्री की दौड़ में गोविंद दास और टी. विश्वजीत सिंह भी शामिल थे। गोविंद दास 7 बार के विधायक हैं और उन्हें बीरेन सिंह का समर्थन भी मिला था। पहले विधायकों की बैठक इंफाल में होनी थी, लेकिन कुकी समुदाय के कुछ विधायक दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठक करना चाहते थे।
मैतेई और कुकी समुदाय के बीच संघर्ष
मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच हिंसा हुई थी, जिसमें अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों लोग बेघर हुए। 13 फरवरी, 2025 को बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और केंद्र सरकार ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया।
मणिपुर का सियासी गणित
मणिपुर विधानसभा में कुल 60 सदस्य हैं। भाजपा के पास 37 विधायक हैं। एनडीए के सहयोगी दलों में एनपीपी के 6 और नागा पीपुल्स फ्रंट (एपीएफ) के 5 विधायक शामिल हैं। राज्य में पहली बार 13 फरवरी, 2025 को 6 महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था, जिसे अगस्त 2025 में और छह महीने के लिए बढ़ाया गया।
- YUKTI RAI















