
इंडोनेशिया के आचेह प्रांत से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। बता दें कि इंडोनेशिया के आचेह प्रांत में शरिया कानून लागु हैं, और इसके तहत एक अविवाहित पुरुष और महिला को 140-140 कोड़ों की सजा दी गई है। बताया जा रहा है कि दोनों पर विवाह से पहले यौन संबंध बनाने और शराब पीने का आरोप था, वहीं, आचेह में लागू इस्लामी शरिया कानून के तहत इसे गंभीर अपराध माना जाता है। अधिकारियों के अनुसार, हाल के वर्षों में दी गई यह सजा सबसे कठोर दंडों में शामिल है। बता दें कि इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम-बहुल देश है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर यहां धर्मनिरपेक्ष कानून लागू हैं। इसके बावजूद आचेह एकमात्र ऐसा प्रांत है, जहां पूरी तरह से शरिया कानून लागू किया गया है।
सार्वजनिक पार्क में दी गई सजा
एक की रिपोर्ट के मुताबिक यह सजा बांडा आचेह के एक सार्वजनिक पार्क में दी गई। मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे। जानकारी के मुताबिक शरिया पुलिस ने दोनों दोषियों को बेंत से पीठ पर कोड़े मारे। सजा के दौरान महिला की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ी, जिसके बाद उसे तुरंत एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। इसके बावजूद शरिया पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सजा को कानून के अनुसार पूरा माना गया है। अधिकारियों का कहना है कि शरिया कानून के तहत तय प्रक्रिया का पालन किया गया और चिकित्सा निगरानी भी मौजूद थी।
140 कोड़ों की सजा कैसे हुई तय
शरिया पुलिस के मुताबिक दोनों को विवाह से पहले यौन संबंध बनाने के लिए 100 कोड़े और शराब पीने के लिए 40 कोड़े दिए गए। इस तरह कुल 140 कोड़े प्रति व्यक्ति तय किए गए। बांडा आचेह के शरिया पुलिस प्रमुख मुहम्मद रिज़ाल ने एक इंटरव्यू के जारिए इस सजा की पुष्टि की। अधिकारियों ने बताया कि इतनी अधिक संख्या में कोड़े आमतौर पर नहीं दिए जाते और यह शरिया कानून लागू होने के बाद की सबसे ऊंची सजाओं में से एक है।
क्यों लागू है शरिया कानून
आचेह प्रांत की कानूनी स्थिति इंडोनेशिया के बाकी हिस्सों से अलग है। लंबे समय तक चले अलगाववादी संघर्ष के बाद वर्ष 2001 में केंद्र सरकार ने आचेह को विशेष स्वायत्तता दी थी। इसी स्वायत्तता के तहत आचेह को इस्लामी शरिया कानून लागू करने की अनुमति मिली। शरिया कानून के अंतर्गत अविवाहित यौन संबंध, शराब पीना, जुआ खेलना और समलैंगिक संबंध जैसे मामलों को अपराध माना जाता है। इन अपराधों के लिए सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने की सजा दी जाती है, जिसे सामाजिक नियंत्रण और डर पैदा करने का माध्यम माना जाता है।
पहले भी मिल चुकी हैं कठोर सजाएं
जानकारी के मुताबिक 140 कोड़ों की सजा शरिया कानून के इतिहास में सबसे कठोर सजाओं में गिनी जाती है। इससे पहले वर्ष 2025 में दो पुरुषों को समलैंगिक संबंधों के आरोप में 76-76 कोड़े मारे गए थे, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हुई थी।
written by- Toshi Shah








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