
आपने अक्सर देखा होगा कि डॉक्टर सफेद कोट में और वकील काले कोट में नजर आते हैं। दुनिया के ज़्यादातर देशों में यही उनकी पहचान बन चुकी है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन दोनों पेशों के लिए यही रंग क्यों तय किए गए? क्या कोई और रंग नहीं चुना जा सकता था? दरअसल, इसके पीछे इतिहास, मनोविज्ञान और प्रोफेशनल सोच की एक खास कहानी छुपी है।
सफेद रंग क्यों पहनते हैं डाक्टर
सफेद रंग को लंबे समय से साफ-सफाई, पवित्रता और ईमानदारी का प्रतीक माना जाता है। 19वीं सदी में जब मेडिकल साइंस ने तेजी से तरक्की की और अस्पतालों में स्वच्छता को सबसे ज़्यादा महत्व दिया जाने लगा, तब डॉक्टरों ने सफेद कोट पहनना शुरू किया। सफेद कपड़े पर गंदगी या दाग तुरंत दिख जाते हैं, जिससे डॉक्टरों में साफ-सफाई को लेकर सतर्कता बनी रहती है। इसके अलावा, मरीज जब सफेद कोट पहने डॉक्टर को देखते हैं, तो उनके मन में भरोसा पैदा होता है। यह कोट डॉक्टर को प्रोफेशनल पहचान देता है और मरीजों को मानसिक रूप से सुरक्षित महसूस कराता है।
वकील क्यों पहनते हैं काला कोट
वकीलों का काला कोट केवल पहनावा नहीं, बल्कि उनके पेशे की गंभीरता और गरिमा का प्रतीक है। काले रंग को अधिकार, अनुशासन और सम्मान से जोड़ा जाता है। इतिहास के अनुसार, 17वीं सदी के ब्रिटेन में शासकों की मृत्यु या बड़े शोक के समय न्यायाधीश और वकील काले कपड़े पहनते थे। समय के साथ यही परंपरा उनकी स्थायी यूनिफॉर्म बन गई। काला कोट वकीलों को कोर्ट में गंभीर, निष्पक्ष और प्रभावशाली छवि देता है, साथ ही, इस रंग में दाग-धब्बे कम नजर आते हैं, जिससे उनका लुक हमेशा सधा हुआ और प्रोफेशनल बना रहता है।
रंगों दर्शाता हैं पहचान
डॉक्टर का सफेद कोट और वकील का काला कोट उनके काम की प्रकृति को साफ तौर पर दर्शाता है। जहां सफेद रंग इलाज, भरोसे और मानवता का संदेश देता है, वहीं काला रंग न्याय, अनुशासन और गंभीरता को दर्शाता है। यही वजह है कि ये रंग सिर्फ कपड़े नहीं, बल्कि इन पेशों की पहचान बन चुके हैं। इन रंगों के जरिए समाज में इन प्रोफेशनल्स के प्रति सम्मान और विश्वास दोनों कायम रहते हैं।
written by- Toshi Shah



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