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गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला प्राण प्रतिष्ठा का तीसरा वर्षगांठ मनाया जाएगा। यह दिन भगवान श्रीराम के बाल रूप, रामलला की पूजा, भजन और आरती का विशेष अवसर है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस दिन मंदिर में इकट्ठा होंगे और सामूहिक भक्ति, रामकथा और दान-धर्म में हिस्सा लेंगे। माघ मास और उत्तरायण सूर्य के योग से यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। गुरुवार का दिन गुरु तत्व से जुड़ा होने के कारण धर्म, भक्ति और ज्ञान के लिए विशेष महत्व रखता है, जो समाज में सद्भाव और पुण्य ऊर्जा का संचार करता है।
राम मंदिर का इतिहास
अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि पर प्राचीन रामलला मंदिर को 16वीं शताब्दी में नष्ट कर दिया गया था। इसके बाद 500 साल तक विवाद चलता रहा। दशकों की कानूनी लड़ाई और संघर्ष के बाद आधुनिक काल में भव्य राम मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। यह इतिहास का एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण माना जाता है।
शुभ मुहूर्त और आध्यात्मिक महत्व
रामलला प्रतिष्ठा का मुहूर्त 22 जनवरी 2026 को दोपहर 12:29 मिनट से 12:30 मिनट तक निर्धारित किया गया है। यह दिन माघ मास में आता है, जिसे पुण्य और तप का महीना माना जाता है। इस समय सूर्य देव उत्तरायण होते हैं, जो शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं। गुरुवार का दिन गुरु तत्व से जुड़ा होता है, जिससे यह दिवस धर्म, ज्ञान और भक्ति के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है।
सामूहिक भक्ति और शुभ प्रभाव
रामलला प्रतिष्ठा दिवस पर देश भर में मंदिरों में दीप, भजन, रामकथा पाठ और सामूहिक पूजा का आयोजन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, बड़ी संख्या में भक्तों की एकत्रित भक्ति से सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्य न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक स्तर पर भी धर्म, सद्भाव और एकता को बढ़ावा देते हैं। यही कारण है कि रामलला प्रतिष्ठा दिवस को विशेष पुण्यदायी और दिव्य अवसर माना जाता है।
- YUKTI RAI

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