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इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर पॉजटिव रुख दिखाया है। IMF ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3% कर दिया है। इससे पहले यह अनुमान कम था, जिसे अब 0.7% अंक बढ़ाया गया है। IMF का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है, खासकर चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में।
तीसरी तिमाही के बेहतर नतीजों का असर
IMF की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की GDP ग्रोथ में यह सुधार साल की तीसरी तिमाही में आए मजबूत आर्थिक आंकड़ों के कारण किया गया है। मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और घरेलू खपत में सुधार देखने को मिला है। इसके अलावा, चौथी तिमाही में भी आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी बनी रहने के संकेत मिले हैं, जिससे पूरे साल की ग्रोथ को मजबूती मिली है।
निवेश और खपत से बनी मजबूती
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी पूंजीगत खर्च, बुनियादी ढांचे में निवेश और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। साथ ही, शहरी क्षेत्रों में मांग मजबूत बनी हुई है। महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण और रोजगार के अवसर बढ़ने से उपभोक्ता खर्च में भी सुधार हुआ है, जिसने ग्रोथ को गति दी है।
आगे ग्रोथ में आ सकती है नरमी
हालांकि IMF ने आने वाले साल को लेकर थोड़ा सतर्क रुख अपनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 और 2027 में भारत की GDP ग्रोथ घटकर 6.4 प्रतिशत रह सकती है। इसका कारण कुछ साइक्लिकल और अस्थायी कारकों का कमजोर पड़ना बताया गया है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ब्याज दरों का असर और बाहरी मांग में संभावित गिरावट भारत की ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है।
भारत बना रहेगा तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था
IMF का मानना है कि इन चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा। मजबूत घरेलू बाजार, युवा आबादी और सुधारों पर जोर भारत की आर्थिक नींव को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखेगा।
- YUKTI RAI

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