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मुंबई की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। BMC चुनाव में 45 साल बाद पहली बार भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और अब पार्टी अपने मेयर को चुनने की स्थिति में है। लंबे समय तक उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना का वर्चस्व रहा, लेकिन इस बार भाजपा गठबंधन ने पूरी बाजी पलट दी है।
BMC चुनाव में भाजपा का दबदबा
इस बार के BMC चुनाव में भाजपा गठबंधन ने कई वार्डो में जीत दर्ज की। कुल 227 सीटों में महायुति को 118 सीटें मिलने की संभावना है। BJP को 90 सीटों की बढ़त है, जबकि शिंदे की शिवसेना को 28 सीटों में बढ़त मिली है। विपक्ष की स्थिति कमजोर दिख रही है और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) 63 सीटों पर ही आगे चल रही है।
45 साल में पहली बार मेयर बनाने की स्थिति
BJP के लिए यह ऐतिहासिक मौका है। 1980 में गठन के बाद पहली बार पार्टी BMC में सबसे बड़ी बनकर मुंबई में मेयर बनाने की स्थिति में है। पिछली बार 2017 में बीजेपी ने 82 सीटें जीती थीं, लेकिन गठबंधन की वजह से शिवसेना को समर्थन देना पड़ा। इस बार स्थिति पूरी तरह बदल गई है।
मेयर पद के लिए संभावित उम्मीदवार
BJP ने साफ कर दिया है कि उसका मेयर मराठी समुदाय का ही होगा। दहिसर सीट से जीत हासिल करने वाले तेजस्वी घोषालकर को पार्टी के मेयर पद का संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। इसके अलावा कई बड़े नेता पार्षद चुने गए हैं। अब यह तय होना बाकी है कि पार्टी किसे अपने मेयर के रूप में चुनेगी।
कैसे होता है मेयर का चुनाव
BMC में कुल 227 पार्षद चुने जाते हैं, जिन्हें नगर सेवक या कॉरपोरेटर कहा जाता है। मेयर का चुनाव इन पार्षदों के वोटों से होता है। मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है, जबकि पार्षद 5 साल के लिए चुने जाते हैं। बहुमत वाली पार्टी अपने मेयर को चुनने में सबसे बड़ी दावेदार होती है।
मेयर का पद और असली ताकत
BMC में मेयर को राजनीतिक विंग का प्रमुख माना जाता है। हालांकि प्रशासनिक काम नगर आयुक्त के नेतृत्व में होता है। मेयर का पद भले ही सबसे बड़ा हो, लेकिन शहर के प्रशासनिक निर्णयों में नगर आयुक्त की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस बार बीजेपी का बहुमत मेयर पद और राजनीतिक शक्ति दोनों में उन्हें बढ़त दे रहा है।
- YUKTI RAI

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