.jpg)
हरिद्वार स्थित सनातन परंपरा के प्रमुख तीर्थ हरकी पैड़ी की पवित्रता और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए श्री गंगा सभा ने सख्त कदम उठाए हैं। क्षेत्र में कई स्थानों पर अहिंदू प्रवेश निषेध के बोर्ड लगाए गए हैं, वहीं ड्रोन उड़ाने, रील बनाने और किसी भी तरह की वीडियो शूटिंग पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
अहिंदू प्रवेश निषेध के बोर्ड लगाए गए
हरकी पैड़ी क्षेत्र में 10 से अधिक प्रमुख स्थानों पर “अहिंदू प्रवेश निषेध” से जुड़े सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। ये बोर्ड हरकी पैड़ी, मालवीय द्वीप और अस्थि प्रवाह घाट जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों पर लगाए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को नियमों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
ड्रोन, रील और शूटिंग पर पूरी तरह रोक
श्री गंगा सभा ने साफ कर दिया है कि हरकी पैड़ी और आसपास के पवित्र क्षेत्रों में ड्रोन उड़ाना, फिल्मी गानों पर रील बनाना, किसी भी तरह की वीडियो या फिल्म शूटिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि इन नियमों का उल्लंघन कर बनाई गई सामग्री सोशल मीडिया पर वायरल होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कुंभ क्षेत्र को “अमृत क्षेत्र” घोषित करने की मांग
श्री गंगा सभा, तीर्थ पुरोहितों, संत-संन्यासियों और धार्मिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि पूरे कुंभ क्षेत्र को “अमृत क्षेत्र” घोषित किया जाए। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में केवल हिंदू श्रद्धालु, प्रशासनिक अधिकारी, पत्रकार और स्वयंसेवक ही प्रवेश करें, जिससे सनातन परंपराओं की गरिमा बनी रहे।
बोर्ड लगाने का उद्देश्य क्या है?
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने बताया कि बोर्ड लगाने का मकसद किसी को अपमानित या रोकना नहीं है, बल्कि तीर्थ क्षेत्र से जुड़े नियमों और धार्मिक मर्यादाओं की जानकारी देना है। उन्होंने कहा कि हरकी पैड़ी वह स्थान है, जहां श्रद्धालु गंगा स्नान, गंगाजल का आचमन और प्रसाद ग्रहण करने आते हैं। यहां आने वाले लोगों की आस्था सनातन परंपराओं से जुड़ी होती है, और इस पवित्रता को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
पूरे कुंभ क्षेत्र में नियम लागू करने की मांग
नितिन गौतम ने यह भी कहा कि हरकी पैड़ी में जो नियम लागू हैं, उन्हें पूरे कुंभ क्षेत्र में लागू किया जाना चाहिए। यदि कुंभ क्षेत्र को अमृत क्षेत्र घोषित किया जाता है, तो वहां गैर-हिंदुओं का प्रवेश स्वतः ही प्रतिबंधित हो जाएगा। उन्हें उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में जल्द निर्णय लेगी।
कोई नया नियम नहीं, तीर्थ पुरोहित
तीर्थ पुरोहित उज्जवल पंडित ने स्पष्ट किया कि अहिंदू प्रवेश निषेध कोई नया नियम नहीं है। यह प्रावधान वर्ष 1916 के म्युनिसिपल एक्ट और नगर निगम के बायलॉज में पहले से मौजूद है। उन्होंने कहा कि लगाए गए बोर्ड केवल उसी व्यवस्था को सार्वजनिक रूप से बताने का माध्यम हैं, ताकि किसी को भ्रम न हो और धार्मिक मर्यादाओं का पालन हो सके।
- YUKTI RAI

.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)

.jpg)
.jpg)


