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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के छोटे बेटे अभिमन्यू यादव ने रविवार यानी 30 नवंबर को उज्जैन में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में डॉ. इशिता यादव से शादी कर लिया जो अनोखा मिसाल अपने आप में दर्शाता है। माना जा रहा है कि वे देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गए हैं जिनके बेटे की शादी किसी सामूहिक विवाह कार्यक्रम में हुई है। इस शादी में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी बाराती बनकर शामिल हुए।
सामूहिक विवाह में सीएम के बेटे की शादी
सीएम मोहन यादव के बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव ने डॉ. इशिता यादव के साथ सात फेरे लिए। यह शादी उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे आयोजित बड़े सामूहिक विवाह कार्यक्रम का हिस्सा थी, जिसमें कुल 22 जोड़ों की शादी हुई। आमतौर पर वीवीआईपी परिवार पांच सितारा होटलों में भव्य समारोह करते हैं, लेकिन सीएम ने अपने बेटे की शादी सरल और पारंपरिक तरीके से कर हर किसी को चौंका दिया।
क्यों चर्चा में है यह शादी?
पूरा देश इस शादी को लेकर चर्चा कर रहा है क्योंकि सीएम के बेटे की शादी किसी भव्य डेस्टिनेशन वेडिंग की जगह एक सामान्य कार्यक्रम में हुई है। अभिमन्यु पेशे से डॉक्टर हैं और MS (Master of Surgery) कर चुके हैं। वहीं इशिता अभी MBBS की पढ़ाई कर रही हैं। इशिता, खरगोन जिले के किसान दिनेश पटेल यादव की बेटी हैं, जिससे इस शादी ने “समानता” और “सरलता” का संदेश भी दिया।
शादी की रस्में और वायरल तस्वीरें
मुख्यमंत्री आवास पर शादी की रस्में पूरी की गईं और फिर उज्जैन में सामूहिक विवाह हुआ। सोशल मीडिया पर अभिमन्यु और इशिता की बैलगाड़ी वाली तस्वीर खूब वायरल हो रही है जिसमें दोनों पारंपरिक तरीके से बैठे नजर आ रहे हैं।
VVIP मेहमानों की मौजूदगी
इस कार्यक्रम में कई बड़े नेता और संत शामिल हुए। जिनमें बाबा रामदेव, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज्यपाल मंगू भाई पटेल, तुलसी सिलावट और कई मंत्री मौजूद रहें।
धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा?
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस शादी को “समाज के लिए प्रेरणा” बताया। उन्होंने कहा कि सीएम मोहन यादव ने अमीर-गरीब और ऊंच-नीच का भेद मिटाते हुए एक बड़ी मिसाल बनाई है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी शादियां फिजूलखर्ची कम करेंगी और लोगों को सरलता की ओर प्रेरित करेंगी।
सीएम मोहन यादव का संदेश
सीएम ने कहा कि यह फैसला उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के मंत्र के अनुसार लिया है। वे चाहते हैं कि समाज के सभी वर्ग एक मंच पर आएं और समानता की भावना को बढ़ावा मिले।
Saurabh Dwivedi


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