बिहार में सहायक प्राध्यापक बहाली को लेकर अब सवाल सिर्फ अभ्यर्थियों के नहीं, बल्कि एनडीए के अंदर से भी उठने लगे हैं। लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर नियुक्ति नियमावली-2026 के कई प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की है। चिराग की 6 मांगों के बाद सरकार की भर्ती नीति को लेकर बहस तेज हो गई है।

क्या भर्ती के मौजूदा नियम अभ्यर्थियों के लिए मुश्किल बढ़ा रहे हैं?
सहायक प्राध्यापक भर्ती की प्रस्तावित नियमावली को लेकर अभ्यर्थियों और शिक्षकों के बीच पहले से चर्चा है। अब चिराग पासवान के पत्र ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग भी दे दिया है। सवाल यह है कि अगर नियमों को लेकर इतने बड़े स्तर पर आपत्तियां सामने आ रही हैं, तो क्या सरकार ने नियमावली तैयार करने से पहले सभी पक्षों की राय पर्याप्त रूप से ली?

चिराग ने सरकार के सामने रखीं 6 मांगें
चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री से कई अहम प्रावधानों में बदलाव या पुनर्विचार की मांग की है।

1. यूजीसी के नियम लागू हों
भर्ती प्रक्रिया में यूजीसी विनियम-2018 की तालिका 3ए को लागू करने की मांग की गई है।

2. उम्र सीमा 55 साल हो
अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 55 वर्ष करने की मांग रखी गई है।

3. नियमित नियुक्ति हो
सहायक प्राध्यापकों की भर्ती स्थायी और नियमित व्यवस्था के तहत कराने पर जोर दिया गया है।

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4. डोमिसाइल नीति लागू हो
बिहार के अभ्यर्थियों के हित में भर्ती में डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग की गई है।

5. विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बची रहे
विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता बनाए रखने की बात कही गई है।

6. अतिथि शिक्षकों के अनुभव को नजरअंदाज न किया जाए
लंबे समय से काम कर रहे योग्य अतिथि सहायक प्राध्यापकों के अनुभव और भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित अवसर या सेवा-समायोजन की व्यवस्था की मांग की गई है।

एनडीए में ही क्यों उठने लगे सवाल?
चिराग पासवान खुद एनडीए का हिस्सा हैं। ऐसे में उनकी ओर से मुख्यमंत्री को सीधे पत्र लिखकर नियमावली के कई पहलुओं पर पुनर्विचार की मांग करना सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे एनडीए में कोई बड़ा मतभेद पैदा हो गया है। लेकिन इतना जरूर है कि भर्ती नियमों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा है।

अभ्यर्थियों का सवाल- नियम बनाने से पहले हमारी राय क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन नियमों से हजारों अभ्यर्थियों और वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों का भविष्य प्रभावित होना है, उन्हें तैयार करने से पहले क्या पर्याप्त चर्चा हुई? अब चिराग पासवान ने भी व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत बताई है। ऐसे में सरकार के सामने नियमावली को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना बड़ी चुनौती हो सकती है।

Written By: Shivani Gupta