NEWDELHINEWS : नई दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों और प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधिमंडल से आज मुलाकात की। बैठक में राहुल गांधी ने परियोजना से आदिवासियों व स्थानीय नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभावों, विस्थापन और उनकी प्रमुख मांगों पर विस्तृत चर्चा की। इसके साथ ही उनकी सभी समस्याओं पर व मांगों में समर्थन देने के साथ-साथ उनकी लड़ाई में खड़े होने का भरोसा भी दिया।


मुआवजे के वितरण की जांच को लेकर की मांग


केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उनकी समस्याओं को सुना और उनकी मांगों पर भी चर्चा की। अब इस पूरे मामले में अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के सबूत और अन्य समस्याओं को उजागर भी किया गया है। असल में लोगों की समस्याओं का समाधान सरकार को करना था। क्योंकि सरकार ने जो करोड़ों रुपए इन परियोजनाओं में दिए हैं वो उन लोगों तक पहुंचा ही नहीं। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिले में बीते कई वर्षों में विभिन्न परियोजनाओं में मुआवजे के वितरण की जांच की बात भी रखी गई। प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले में विस्थापितों को न्याय मिलने और भ्रष्ट अधिकारियों को सजा मिलने की बात की।


क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना

दरअसल केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली बड़ी नदी-जोड़ो परियोजना है। जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त पानी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी तक पहुंचाना है। इसके जरिए सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों को पीने का पानी और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। किसानों के लिए इसका पानी सिंचाई के काम आएगा तो कृषि का उत्पादन व पैदावार भी ग्रोथ करेगी।


सरकार ने सदन में उठाया था मुद्दा


कुछ दिन पहले सरकार ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना राष्ट्रीय दृष्टिकोण योजना के तहत एकमात्र प्राथमिकता लिंक परियोजना है। इस पर सरकार की तरफ से चरण बद्ध तरीके से कार्रवाई की जा रही है। परियोजना को एक नई पहचान देने पर भी जोर दिया जा रहा है। जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरीी ने राज्यसभा में उठाए इस मुद्दे पर कहा कि सरकार ने जलाशय संग्रह पर हस्तातरण को लेकर एनपीए तैयार किया। जिसमें पीने के पानी, सिंचाई के लिए परियोजना, बिजली व सौर उर्जा प्रदान करना मुख्य उपद्देश है।


केन-बेतवा को लेकर संघर्ष कर रहे अमित भटनागर ने पूर्व में कहा

केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ संघर्षरत अमित भटनागर का दर्द केवल एक आंदोलन का बयान नहीं, बल्कि इस देश की असमान व्यवस्था पर एक गहरा सवाल है। वे कहते हैं कि जब दिल्ली या बड़े शहरों में कोई संकट आता है, तो उसकी गूंज पूरे देश के कानों तक पहुंचती है, लेकिन गांवों की चीखें बीच रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं। हमारे इस संघर्ष को महज 'मुआवज़े की मांग' का नाम देकर छोटा करने की साज़िश की जाती है, जबकि सच यह है कि यह लड़ाई चंद पैसों की नहीं, बल्कि हमारी जल, जंगल, ज़मीन और पूरी जिंदगी की अस्तित्वगत लड़ाई है।

Written By: MADHVI TANWAR