नई दिल्ली: भारत 2047 तक खुद को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ अपनी सैन्य ताकत को भी भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बदलने की तैयारी में है। भारतीय सेना के विजन-2047 में ऐसी सेना तैयार करने पर जोर है, जो पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर और अंतरिक्ष जैसे नए क्षेत्रों में भी तेजी से कार्रवाई कर सके।
युद्ध का तरीका बदलेगा, तकनीक बनेगी सबसे बड़ी ताकत
भविष्य की लड़ाई सिर्फ सैनिकों और पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहने वाली। ड्रोन, स्वायत्त प्रणालियां, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और अंतरिक्ष आधारित तकनीक युद्ध के अहम हिस्से बन रहे हैं। भारत की 2047 की सैन्य सोच में भी इन तकनीकों को प्राथमिकता देने की बात सामने आई है। लक्ष्य ऐसी सेना तैयार करना है, जो कम समय में ज्यादा जानकारी जुटा सके, तेजी से निर्णय ले सके और जरूरत पड़ने पर सटीक कार्रवाई कर सके।
ड्रोन और स्वायत्त सिस्टम पर खास जोर
आने वाले वर्षों में ड्रोन युद्ध का स्वरूप बदल सकते हैं। निगरानी से लेकर लक्ष्यों की पहचान और युद्धक्षेत्र में सहायता तक इनके इस्तेमाल का दायरा बढ़ रहा है। विजन-2047 में ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों को सेना के आधुनिकीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। इसका मकसद सैनिकों की क्षमता बढ़ाने के साथ जोखिम वाले इलाकों में तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल करना है।
एआई से तेज होंगे फैसले
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का इस्तेमाल सैन्य क्षेत्र में खुफिया जानकारी के विश्लेषण, निगरानी, निर्णय लेने और युद्धक्षेत्र की स्थिति समझने में मदद कर सकता है। भविष्य की सेना में बड़ी मात्रा में मिलने वाले आंकड़ों को तेजी से समझना बेहद महत्वपूर्ण होगा। एआई इसी दिशा में सेना को तकनीकी बढ़त देने वाला प्रमुख माध्यम बन सकता है।
साइबर और अंतरिक्ष भी होंगे युद्ध के नए मोर्चे
2047 की आधुनिक सेना सिर्फ जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं होगी। साइबर और अंतरिक्ष भी सैन्य रणनीति के महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुके हैं। भारत पहले ही रक्षा अंतरिक्ष और साइबर क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। थिएटर कमांड के साथ संयुक्त संचालन और इन नई क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल भविष्य की सैन्य संरचना का अहम हिस्सा हो सकता है।
थिएटर कमांड से तीनों सेनाओं में बढ़ेगा तालमेल
भारतीय सेना के आधुनिकीकरण में थिएटर कमांड को भी बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसका उद्देश्य सेना, नौसेना और वायुसेना की क्षमताओं को एकीकृत करके युद्ध की स्थिति में बेहतर तालमेल बनाना है। 2026 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने बताया था कि एकीकृत थिएटर कमांड के पुनर्गठन को लेकर सिफारिशें रक्षा मंत्रालय को सौंपी जा चुकी हैं। प्रस्तावित ढांचे में चीन केंद्रित उत्तरी, पाकिस्तान केंद्रित पश्चिमी और समुद्री थिएटर कमांड की योजना पर काम हुआ है।
लंबी दूरी के सटीक हथियारों पर भी फोकस
भविष्य के युद्ध में सिर्फ ज्यादा हथियार होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सही समय पर सही लक्ष्य पर सटीक हमला करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी। इसी वजह से लंबी दूरी तक मार करने वाले सटीक हथियारों को भी सेना के भविष्य के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। हाइपरसोनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी भारत की दिलचस्पी बढ़ी है। हालांकि किसी विशेष हथियार की तय समयसीमा या 2047 तक उसकी तैनाती को लेकर दावे करते समय आधिकारिक पुष्टि को ही आधार माना जाना चाहिए।
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आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन बनेगा आधार
विजन-2047 का एक बड़ा लक्ष्य स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करना भी है। आधुनिक हथियारों और तकनीकों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने के साथ घरेलू अनुसंधान और उत्पादन को बढ़ावा देना भारत की दीर्घकालिक रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यानी 2047 की सेना सिर्फ नई तकनीक खरीदने वाली सेना नहीं, बल्कि अपनी जरूरत के मुताबिक तकनीक विकसित और तैयार करने वाली सेना बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
कैसी होगी 2047 की भारतीय सेना?
अगर इस विजन को पूरी तरह लागू किया जाता है तो 2047 तक भारतीय सेना में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जमीन पर आधुनिक और तकनीक-सक्षम लड़ाकू इकाइयों से लेकर ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों तक, सेना का ढांचा पहले से ज्यादा एकीकृत और तकनीक आधारित हो सकता है।
Written By: Shivani Gupta